अयोध्या में भगवान राम के घर लौटने के जश्न के अवसर पर दीपोत्सव 2025 की तैयारियों के बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और इंडि गठबंधन पर तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन के दौरान करसेवकों पर गोली चलाई, वे कभी 2024 में मंदिर के भव्य उद्घाटन में शामिल नहीं हुए।मुख्यमंत्री ने कहा,“जिन लोगों ने गोली चलाई, वे राम मंदिर के प्राणप्रतिष्ठा समारोह में कभी नहीं आए। राम मंदिर आंदोलन के दौरान, जो लोग मंदिर के निर्माण को रोकने के लिए तैनात थे, उन्होंने गोलियां चलाई, जबकि हमने दीप जलाए।”
योगी आदित्यनाथ का इशारा उस समय के मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव की ओर था, जिन्होंने 1990 में बाबरी मस्जिद (जहां अब श्री राम जन्मभूमि मंदिर है) की ओर बढ़ रहे करसेवकों पर पुलिस को आदेश देकर गोलियां चलवाई थी।मुख्यमंत्री ने आगे कहा,“हर दीप हमें याद दिलाता है कि सत्य को परेशान किया जा सकता है, लेकिन उसे परास्त नहीं किया जा सकता। सत्य की यही नियति है कि वह विजयी होगा। इसी विजय की नियति के साथ, सनातन धर्म ने 500 वर्षों से लगातार संघर्ष किया। इन संघर्षों का परिणाम है कि अयोध्या में एक भव्य और दिव्य मंदिर का निर्माण हुआ।”
अक्टूबर 1990 में, मुलायम सिंह यादव ने एल.के.आडवाणी और उनके समर्थकों को अयोध्या में प्रवेश करने से रोकने के लिए पुलिस कार्रवाई का आदेश दिया। उन्होंने कहा,“वे अयोध्या में प्रवेश करने की कोशिश करें। हम उन्हें कानून का मतलब समझाएंगे। कोई मस्जिद नहीं टूटेगी।”
इस दौरान आडवाणी को बिहार में गिरफ्तार कर लिया गया, जबकि कई करसेवक अयोध्या में इकट्ठा हो चुके थे। जब वे बाबरी मस्जिद की ओर मार्च करने लगे, पुलिस और करसेवकों के बीच संघर्ष हुआ। भीड़ के पीछे हटने का कोई संकेत न होने पर पुलिस ने फायरिंग की, जिससे भगदड़ और अफरातफरी मच गई।
2 नवंबर को करसेवकों ने नए तरीके से मार्च जारी रखा, लेकिन तीन दिन बाद पुलिस ने फिर फायरिंग की। इस दौरान महिलाओं और बुजुर्गों समेत कई लोग घायल हुए। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 17 लोगों की मौत हुई, हालांकि सच्चाई यह है की हताहतों की संख्या इससे कहीं अधिक थी, जो मुलायम सरकार ने कभी सामने आने ही नहीं दी। इन घोर मानवाधिकार उल्लंघन के बावजूद एक रैली में अपनी ही पीठ थपथपाते हुए मुलायम सिंग ने अपनी करतूत की घोषणा की थी, उसे भी तुष्टीकरण की राजनीति का एक भाग कहा गया।
योगी आदित्यनाथ ने दीपोत्सव के अवसर पर स्पष्ट किया कि अयोध्या में अब सत्य और धर्म की विजय का पर्व मनाया जा रहा है, और यह संदेश उन लोगों के लिए है जिन्होंने कभी मंदिर के निर्माण के मार्ग में बाधा डाली। उनके शब्दों में, “जिन लोगों ने अतीत में अयोध्या में अंधकार बनाए रखा, आज हम प्रकाश और भक्ति के दीप जलाते हैं।” इस बयान के साथ मुख्यमंत्री ने दीपोत्सव के अवसर पर अयोध्या में दीपों और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से सत्य और धर्म की विजय का प्रतीक उजागर किया।
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