भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) भूषण रामकृष्ण गवई ने सोमवार (27 अक्तूबर) को सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त करने की सिफारिश की है। सीनियरिटी के आधार पर यह सिफारिश की गई है, जिसके बाद केंद्र सरकार की अधिसूचना जारी होते ही जस्टिस सूर्यकांत देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश बन जाएंगे।
सीजेआई गवई आगामी 23 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। उन्होंने 14 मई 2024 को भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाला था। उल्लेखनीय है कि जस्टिस गवई अनुसूचित जाति समुदाय से आने वाले देश के दूसरे मुख्य न्यायाधीश हैं। उनसे पहले जस्टिस के. जी. बालकृष्णन 2007 से 2010 तक इस पद पर रहे थे।
जस्टिस सूर्यकांत का जन्म 10 फरवरी 1962 को हरियाणा के हिसार जिले में हुआ था। उन्होंने 1984 में महार्षि दयानंद विश्वविद्यालय, रोहतक से कानून में स्नातक की डिग्री प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने हिसार जिला अदालत से वकालत की शुरुआत की।
एक वर्ष बाद, यानी 1985 में वे चंडीगढ़ चले गए और पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की। उन्होंने संवैधानिक, सेवा एवं सिविल मामलों में विशेषज्ञता हासिल की। 7 जुलाई 2000 को उन्हें हरियाणा का सबसे युवा महाधिवक्ता (Advocate General) नियुक्त किया गया।
जनवरी 2004 में जस्टिस सूर्यकांत को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय का स्थायी न्यायाधीश बनाया गया। इसके बाद 5 अक्टूबर 2018 को उन्होंने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यभार संभाला।
9 मई 2019 को तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाले सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने जस्टिस सूर्यकांत को सर्वोच्च न्यायालय में पदोन्नत करने की सिफारिश की थी। इसके बाद 24 मई 2019 को उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा।
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