32 C
Mumbai
Thursday, March 12, 2026
होमन्यूज़ अपडेटमंगलयान-2 को मंगल ग्रह पर उतारने की तैयारी कर रहा है ISRO

मंगलयान-2 को मंगल ग्रह पर उतारने की तैयारी कर रहा है ISRO

प्रारंभिक मिशन अध्ययन और डिज़ाइन कार्य ISRO के स्पेस एप्लिकेशंस सेंटर और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में पहले ही शुरू हो चुके हैं।

Google News Follow

Related

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने आधिकारिक रूप से घोषणा की है कि देश पहली बार मंगल ग्रह पर उतरने का साहसिक प्रयास करेगा। इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने बुधवार (5 नवंबर) को इस बात की पुष्टी की मिशन मंगलयान-2 2030 में लॉन्च होने की योजना है।

भारत ने सबसे पहले नवंबर, 2013 में मंगलयान (Mars Orbiter Mission – MOM) लॉन्च कर इतिहास रचा था। यह मिशन पहली कोशिश में ही मंगल की कक्षा में पहुँचने वाला पहला देश बनने का गौरव हासिल कर चुका है और इस तरह भारत को एशिया का पहला ऐसा देश बनने का मौका मिला। मंगलयान ने सात वर्षों तक मंगल के वातावरण, खनिज संरचना और सतही छवियों के बारे में अमूल्य डेटा प्रदान किया। हालांकि, 2022 में इस मिशन से संपर्क टूट गया।

मंगलयान-2 अपने पूर्ववर्ती से तकनीकी रूप से एक बड़ा कदम आगे है। जहां पहला मिशन केवल कक्षा में कार्य करने वाला ऑर्बिटर था, नया मिशन ऑर्बिटर और लैंडर दोनों तैनात करेगा, और संभावना है कि इसके साथ एक छोटा रोवर भी भेजा जा सकता है।

इसरो इस मिशन के लिए उन्नत प्रणोदन (propulsion), नेविगेशन और लैंडिंग सिस्टम विकसित कर रहा है, ताकि पतली मंगल वायुमंडल में सुरक्षित और सटीक अवतरण सुनिश्चित किया जा सके। इसरो के अधिकारियों ने IndiaToday.in को बताया, “मंगलयान-2 केवल मंगल की कक्षा में प्रवेश करने के लिए नहीं बनाया जा रहा है, बल्कि यह भारत की किसी अन्य ग्रह पर पहली सॉफ्ट लैंडिंग का प्रयास है।” यह मिशन भारत की अंतरग्रहीय खोज में एक साहसिक कदम है और अंतरिक्ष में दीर्घकालिक उपस्थिति के हमारे लक्ष्य से मेल खाता है।

प्रारंभिक मिशन अध्ययन और डिज़ाइन कार्य ISRO के स्पेस एप्लिकेशंस सेंटर और विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर में पहले ही शुरू हो चुके हैं। इसके साथ ही, इसरो वैज्ञानिक पेलोड और डेटा साझा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की संभावनाओं का भी अध्ययन कर रहा है, जैसे कि उसने पहले चंद्रयान-3 और NISAR मिशनों में किया था।

यदि मंगलयान-2 सफल होता है, तो भारत उन कुछ देशों की सूची में शामिल हो जाएगा, जिन्होंने मंगल पर उतरने में सफलता प्राप्त की है। इस सूची में वर्तमान में संयुक्त राज्य अमेरिका, चीन और सोवियत संघ शामिल हैं। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह मिशन भारत की डीप-स्पेस ऑटोनोमस नेविगेशन, सतही इमेजिंग और भू-रासायनिक विश्लेषण क्षमता को भी बढ़ाएगा।

जैसे-जैसे इसरो तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है, 2030 में लॉन्च मंगल खोज में भारत के नए मील का पत्थर और मंगलयान की सफलता की स्थायी विरासत को दर्शाएगा।

यह भी पढ़ें:

एंटीबायोटिक दवाओं का प्रभावी विकल्प हैं एंटीमाइक्रोबियल पेप्टाइड्स, एएमआर से भी निपटने में कारगर: अध्ययन

अमेरिकी सरकारी शटडाउन के बीच हवाई यातायात पर गंभीर असर; हजारों उड़ानें होंगी रद्द!

भारत-पाक संघर्ष में मार गिराए गए विमानों की संख्या इस प्रकार है: ट्रम्प

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

The reCAPTCHA verification period has expired. Please reload the page.

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

151,044फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
297,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें