केरल हाई कोर्ट ने शुक्रवार (14 नवंबर) को राज्य सरकार को बड़ा झटका दिया, जब उसने विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) प्रक्रिया को टालने की मांग वाली याचिका सुनने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति वी.जी. अरुण की एकल पीठ ने साफ कहा कि इसी विषय से जुड़ी याचिकाएँ पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं, इसलिए हाई कोर्ट में इस याचिका को सुनना न्यायिक अनुशासन के खिलाफ होगा।
न्यायमूर्ति अरुण ने अपने आदेश में कहा, “न्यायिक अनुशासन और परंपरा की मांग है कि इस याचिका को इस चरण पर नहीं सुना जाए। अतः यह याचिका बंद की जाती है। याचिकाकर्ता चाहे तो सुप्रीम कोर्ट जा सकता है या फिर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद आवश्यकतानुसार इस अदालत से पुनः संपर्क कर सकता है।” इस टिप्पणी के साथ हाई कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि राज्य सरकार अब सीधे सर्वोच्च न्यायालय में राहत मांग सकती है।
पिनराई विजयन सरकार ने अपनी याचिका में दावा किया था कि पंचायत चुनावों के चलते राज्य के पास पर्याप्त प्रशिक्षित सरकारी कर्मचारियों की कमी है, और ऐसे में SIR कर पाना संभव नहीं होगा। सरकार ने बताया कि पंचायत चुनावों के लिए 1,76,000 सरकारी कर्मचारियों और 68,000 सुरक्षा कर्मियों की तैनाती आवश्यक है। इसके साथ ही SIR प्रक्रिया के लिए 25,668 अतिरिक्त कर्मचारियों की जरूरत पड़ेगी, जिससे प्रशासनिक ढांचा चरमरा जाएगा।
राज्य ने दलील दी कि चुनावी अनुभव वाले कर्मियों की संख्या सीमित है और दोनों प्रक्रियाओं को एकसाथ पूरा करना लगभग असंभव है। सरकार के अनुसार, “21 दिसंबर से पहले पंचायत चुनाव कराना संवैधानिक बाध्यता है, लेकिन SIR के लिए ऐसी कोई तात्कालिकता नहीं है।” सरकार ने यह भी तर्क दिया कि विधानसभा चुनाव मई 2026 से पहले होने हैं, इसलिए SIR को कुछ समय के लिए स्थगित किया जा सकता है।
चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने राज्य सरकार की दलीलों को निराधार बताया। उन्होंने तर्क दिया कि केरल राज्य चुनाव आयोग ने SIR को लेकर कोई आपत्ति नहीं जताई है और यह अभ्यास आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारी के लिए आवश्यक है। उन्होंने याद दिलाया कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(2) के तहत हर आम चुनाव से पहले मतदाता सूची का पुनरीक्षण अनिवार्य है, जब तक कि ECI अन्यथा निर्देश न दे।
सुप्रीम कोर्ट में पहले से ही ADR और NFIW सहित कई संगठनों की याचिकाएँ लंबित हैं, जिन्होंने बिहार में जून 2025 में शुरू किए गए SIR को चुनौती दी थी। बिहार में SIR पूरा होने के बाद ECI ने इसे तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल और केरल सहित अन्य राज्यों में भी लागू करने की घोषणा की थी। तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल सरकारें पहले ही इस पर सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ दाखिल कर चुकी हैं।
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