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Wednesday, October 21, 2026
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छत्तीसगढ़ : बीजापुर में 30 माओवादियों का सामूहिक आत्मसमर्पण!

यह आत्मसमर्पण उप पुलिस महानिरीक्षक केरिपु ऑप्स बीजापुर सेक्टर बीएस नेगी, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के सामने हुआ। 

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छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के बस्तर दौरे के मौके पर 30 माओवादी कैडरों ने हिंसा का रास्ता छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। यह घटना छत्तीसगढ़ सरकार की ‘पूना मारगेम: पुनर्वास से पुनर्जीवन’ अभियान के तहत हुई, जो आत्मसमर्पण और पुनर्वास की नीति पर आधारित है।

ये 30 कैडर साउथ सब जोनल ब्यूरो से जुड़े थे, जिनमें 20 महिलाएं और 10 पुरुष शामिल हैं। इन पर कुल 85 लाख रुपए का इनाम घोषित था। इनमें कंपनी कमांडर, एरिया कमेटी सदस्य, पार्टी सदस्य, डीएकेएमएस और केएएमएस अध्यक्ष और जनताना सरकार के अध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे लोग शामिल हैं। इन कैडरों ने स्वेच्छा से एक कार्डेक्स वायर बंडल और 50 जिलेटिन स्टिक्स सुरक्षा बलों को सौंप दिए।

यह आत्मसमर्पण उप पुलिस महानिरीक्षक केरिपु ऑप्स बीजापुर सेक्टर बीएस नेगी, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के सामने हुआ।

सुरक्षा बलों जैसे डीआरजी, जिला बल, छत्तीसगढ़ स्पेशल फोर्स, एसटीएफ, कोबरा और केरिपु बटालियनों के संयुक्त प्रयासों से यह संभव हुआ। इन बलों ने क्षेत्र में लगातार सक्रियता, विश्वास निर्माण और संवेदनशील व्यवहार से माओवादियों को मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया।

बीजापुर पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र कुमार यादव ने कहा कि माओवादी भ्रामक और हिंसक विचारधाराओं को छोड़कर निर्भर होकर समाज में लौटें। ‘पूना मारगेम’ नीति उनके सुरक्षित, सम्मानजनक और स्वावलंबी भविष्य के लिए हर मदद कर रही है।

पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज सुंदरराज पी. पट्टलिंगम ने बताया कि यह घटना माओवादी संगठन के अंत की ओर तेजी से बढ़ने का संकेत है। सुरक्षा कैंप, बेहतर सड़कें, सफल अभियान और विकास योजनाओं से माओवादियों का आधार सिमट रहा है। उन्होंने बाकी कैडरों से अपील की कि हिंसा में सिर्फ विनाश है, जबकि ‘पूना मारगेम’ शांति और बेहतर जीवन का रास्ता है।

1 जनवरी 2024 से अब तक बीजापुर जिले में 918 माओवादी मुख्यधारा में लौट चुके हैं, 1163 गिरफ्तार हुए और 232 मुठभेड़ों में मारे गए। राज्य सरकार की नक्सल उन्मूलन नीति, सुरक्षा बलों की कार्रवाई और शांति-संवाद-विकास के समन्वित प्रयासों से यह सफलता मिली है। पुनर्वास प्रक्रिया में प्रत्येक कैडर को 50 हजार रुपये की तात्कालिक सहायता दी गई है। विधिक प्रक्रिया जारी है, ताकि ये लोग सम्मानजनक जीवन जी सकें।

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