बिहार विधानसभा चुनावों में आरजेडी की करारी हार के ठीक एक दिन बाद पार्टी प्रमुख लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने एक चौंकाने वाला कदम उठाते हुए राजनीति से संन्यास ले लिया और अपने परिवार से भी संबंध तोड़ने की घोषणा कर दी। शनिवार (15 नवंबर) को पोस्ट किए गए अपने संदेश में रोहिणी ने दावा किया कि यह फैसला उन्होंने तेजस्वी यादव के करीबी संजय यादव और अपने पति रमीज़ आलम के दबाव में लिया है। उन्होंने लिखा, “मैं राजनीति छोड़ रही हूँ और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूँ। यही संजय यादव और रमीज़ चाहते थे… और मैं सारी जिम्मेदारी खुद ले रही हूँ।”
रोहिणी आचार्य पेशे से डॉक्टर, 2024 लोकसभा चुनाव में सारण सीट से आरजेडी उम्मीदवार रही थीं, लेकिन उन्हें भाजपा के राजीव प्रताप रूडी के हाथों हार का सामना करना पड़ा। हालांकि परिवार के भीतर तनाव कई महीनों से उबल रहा था। चुनाव से पहले ही उन्होंने लालू यादव और तेजस्वी यादव को सोशल मीडिया पर अनफॉलो कर दिया था, और समय–समय पर किए गए उनके भावुक व तीखे पोस्ट ने पारिवारिक विवाद को सार्वजनिक कर दिया।
कहा जाता है कि विवाद की जड़ 2022 में रोहिणी द्वारा पिता को की गई किडनी डोनेशन को लेकर उठे संदेह और आरोपों में भी छिपी है। इसी के साथ तेजस्वी यादव के भरोसेमंद सहयोगी और राज्यसभा सांसद संजय यादव की कथित दखलअंदाज़ी ने मामले को और भड़का दिया। बिहार अधिकार यात्रा के दौरान संजय यादव की प्रमुख भूमिका ने रोहिणी को नाराज किया, और एक फोटो पर उनकी अप्रत्यक्ष टिप्पणी के बाद उन्हें परिवार और पार्टी दोनों की तरफ से आलोचना झेलनी पड़ी।
इस विवाद के बीच, तेज प्रताप यादव की पहले हुई पार्टी से निष्कासन ने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया। तेज प्रताप ने खुलकर रोहिणी का समर्थन किया था और अपने विरोधियों पर तीखे हमले करते हुए यहां तक कहा कि उनके खिलाफ ‘सुदर्शन चक्र’ चलाया जाएगा। उन्होंने बार–बार संजय यादव को दोषी ठहराया और उन्हें “जयचंद” तक कहा।
रोहिणी के खुलकर संजय यादव पर सवाल उठाने के बाद आरजेडी परिवार के भीतर असंतोष और बढ़ गया है। संजय पर टिकट वितरण और फैसलों में मनमानी का आरोप लग रहा है। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी उनके खिलाफ कोई कड़ा कदम उठा सकती है।
इस पूरे घटनाक्रम पर भाजपा ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है। बिहार भाजपा नेता नीरज कुमार ने कहा कि लालू यादव परिवार अब तेजस्वी की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं की भेंट चढ़ गया है। उन्होंने टिप्पणी की, “जिस बेटी ने लालू यादव को नई जिंदगी दी, आज वही परिवार और पार्टी से बाहर धकेली जा रही है। पहले बड़े बेटे को निकाला गया, अब बेटी को भी छोड़ दिया गया।”
लालू परिवार के भीतर यह विभाजन उसी परीवार की दरार को और गहरा कर देता है जो तेज प्रताप यादव के निजी विवाद और पार्टी से निष्कासन के बाद खुलकर सामने आई थी। मई में तेज प्रताप के एक विवादित पोस्ट के बाद लालू यादव ने उन्हें छह साल के लिए आरजेडी से निष्कासित कर दिया था और कहा था कि उनका व्यवहार परिवार के मूल्यों के खिलाफ है।
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