अफ़गानिस्तान के विदेश मंत्री अमीर ख़ान मुत्ताक़ी की भारत यात्रा के कुछ ही हफ्तों बाद, तालिबान शासन के उद्योग और वाणिज्य मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अज़ीज़ी बुधवार (19 नवंबर) को नई दिल्ली पहुंचे। अजीजी की पाँच दिवसीय यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जब पाकिस्तान ने सीमा झड़पों के चलते अफ़गानिस्तान के साथ अपने ज़मीनी व्यापार मार्ग बंद कर रखे हैं, जिससे काबुल को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे हालात में अज़ीज़ी की भारत यात्रा अफ़गानिस्तान की नई व्यापारिक रणनीति का अहम हिस्सा मानी जा रही है।
पिछले कई सप्ताह से पाकिस्तान ने अफ़गानिस्तान के साथ अपने प्रमुख बॉर्डर क्रॉसिंग बंद कर दिए हैं, जिससे फलों समेत कई अफ़गान निर्यात उद्योगों को भारी नुकसान पहुँचा है। दोनों देशों के व्यापारिक संगठनों के अनुसार, पाकिस्तान के इस कदम से व्यापारियों को 100 मिलियन डॉलर से अधिक का नुकसान हो चुका है। काबुल ने इस बीच अपने व्यापारियों से पाकिस्तान पर निर्भरता घटाने और नए मार्गों की तलाश करने को कहा है। अज़ीज़ी ने पहले कहा था, “नुकसान हो तो भी स्वीकार है, क्योंकि हमारे पास कोई विकल्प नहीं। हमें अपने अमीरात और शरीयत की रक्षा के लिए यह निर्णय लागू करना ही होगा।”
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने अज़ीज़ी का स्वागत करते हुए कहा कि इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार और निवेश संबंधों को आगे बढ़ाना है। अज़ीज़ी दिल्ली में वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फ़ेयर (IITF) में भी शामिल होंगे। मुत्ताक़ी की अक्टूबर की यात्रा के दौरान दोनों देशों ने साझा व्यापार समिति बनाने पर सहमति जताई थी, जो खनिज, ऊर्जा और अवसंरचना क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर काम करेगी।
भारत ने हाल ही में अपने काबुल मिशन को ‘टेक्निकल मिशन’ से बढ़ाकर एक ‘पूर्ण दूतावास’ का रूप दिया है। इसे तालिबान शासन के साथ औपचारिक और दीर्घकालिक संवाद की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। पाकिस्तान पर निर्भरता से मुक्त होने के लिए अफ़गानिस्तान इन वैकल्पिक मार्गों पर जोर दे रहा है, ईरान का चाबहार बंदरगाह, चीन के साथ वाखान कॉरिडोर, मध्य एशियाई मार्ग, विशेष एयर कॉरिडोर, उभरते क्षेत्रीय रेल नेटवर्क। अज़ीज़ी की यह यात्रा इसलिए भी अहम है क्योंकि भारत इन नए व्यापारिक रूट्स में अफ़गानिस्तान का एक विश्वसनीय साझेदार बन सकता है।
पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण रिश्तों और बंद सीमा चौकियों के चलते अफ़गानिस्तान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है। ऐसे में भारत के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करके काबुल अपनी आर्थिक निर्भरता में विविधता लाना चाहता है।अज़ीज़ी की यह यात्रा न सिर्फ मौजूदा व्यापारिक नुकसानों की भरपाई का प्रयास है, बल्कि अफ़गानिस्तान के वाणिज्य के लिए एक अधिक टिकाऊ और संतुलित संरचना तैयार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
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