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खनिज और दुर्लभ खनिजों भंडारों पर भारत की मांग को अफ़ग़ानिस्तान ने दिखाई हरी झंडी

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अफगानिस्तान और पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और व्यापार मार्गों के अस्थायी रूप से बंद होने के बीच, तालिबान सरकार भारत की ओर निर्णायक रूप से झुकती दिखाई दे रही है। इसी कूटनीतिक पृष्ठभूमि में अफगानिस्तान के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अजीजी अपनी पहली भारत यात्रा पर पहुंचे, भारत के साथ व्यापर को बढ़ावा देने और सूखे मेवे, दवाइयोन जैसे उत्पादों की आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इस दौरे का आयोजन किया है। दरम्यान  उन्होंने एनडीटीवी से विशेष बातचीत में कहा कि अफगानिस्तान भारत के साथ व्यापार के लिए पूरी तरह खुला है और काबुल भारतीय राजनयिकों को पूर्ण सुरक्षा गारंटी देने के लिए तैयार है।

तालिबान के मंत्री की ओर से बयान ऐसे समय आया है जब पाक-अफगान सीमा पर झड़पों से व्यापार ठप पड़ा है, हजारों ट्रक अटक गए हैं और काबुल ने तीन महीने के लिए पाकिस्तान से दवाओं के आयात पर अस्थायी रोक लगा दी है। अजीजी ने स्पष्ट किया कि अफगानिस्तान अब गुणवत्ता वाले उत्पाद और बेहतर शर्तें देने वाले साझेदारों को प्राथमिकता देगा और इस सूची में भारत सबसे ऊपर है।

दिल्ली में एनडीटीवी से बातचीत करते हुए अजीजी ने कहा कि भारत-अफगानिस्तान का मौजूदा द्विपक्षीय व्यापार करीब 1 अरब डॉलर का है, जो उनकी दृष्टि में क्षमता से बहुत कम है। उन्होंने कहा कि उनकी भारत यात्रा का उद्देश्य व्यापार के लिए नए रास्तों की खोज करना है और उन्हें विश्वास है कि ईश्वर की इच्छा से सभी समस्याओं का समाधान मिलेगा। उन्होंने खुलासा किया कि तालिबान प्रशासन भारत–अफगानिस्तान एयर कॉरिडोर को मजबूत करने के लिए एरियाना अफगान एयरलाइंस को सब्सिडी देने और निजी भारतीय कैरियर्स का समर्थन करने पर विचार कर रहा है, जिससे माल ढुलाई सस्ती और अधिक अनुमानित हो सकेगी।

यदि कोई भारतीय कंपनी हवाई मार्ग में निवेश करना चाहे, तो उन्हें हमारी पूरी अनुमति होगी। इसके साथ ही, काबुल ईरान के रास्ते लागत-प्रभावी व्यापार विकल्प तलाश रहा है ताकि पाकिस्तान पर निर्भरता घटाई जा सके।

अजीजी ने अफगानिस्तान के विशाल खनिज और दुर्लभ खनिज भंडारों पर भी भारत की बढ़ती रुचि का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जो कंपनियां उनके खनन नियमों का पालन करेंगी, “उन्हें समान पहुंच” मिलेगी और भारत तकनीकी क्षमता और प्रतिस्पर्धी कीमतों के चलते एक “पसंदीदा भागीदार” बना हुआ है। राजनयिक स्तर पर भी तेज गतिविधि जारी है। अजीजी ने पुष्टि की कि अफगानिस्तान एक महीने के भीतर नई दिल्ली में अपना वाणिज्यिक अटैची भेजेगा और दोनों देशों के बीच नए राजनयिकों की नियुक्ति पर बातचीत जारी है।

उन्होंने दावा किया कि काबुल में भारतीय दूतावास के लिए सुरक्षा पहले ही सुनिश्चित की जा चुकी है और अब अमेरिकी उपस्थिति के दौरान बनाई गई ऊँची विस्फोट-रोधी दीवारें हटाई जा रही हैं। उनके अनुसार, “अफगानिस्तान आज शांतिपूर्ण है।”

पहलगाम में हालिया आतंकी हमले और दिल्ली के पास आत्मघाती विस्फोट पर उन्होंने कहा कि वे घटनाओं से पूरी तरह अवगत नहीं हैं, लेकिन अफगानिस्तान भारत के साथ “शांतिपूर्ण संबंध” चाहता है। उन्होंने कहा, “हमने 50 साल तक कठिनाइयाँ देखी हैं। हम नहीं चाहते कि खून की एक बूंद भी बहे।” महिलाओं के लिए काबुल के चैंबर ऑफ कॉमर्स की नई पहलों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने बताया कि निजी कंपनियों और NGO के सहयोग से 100 मिलियन डॉलर की सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने भारतीय महिला उद्यमियों को अफगान महिला उद्यमियों के साथ सहयोग के लिए आमंत्रित किया।

साथ ही अजीजी ने भारतीय विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को अगले साल जून–जुलाई में अफगानिस्तान के दौरे के लिए औपचारिक निमंत्रण दिया। उन्होंने भारतीय पत्रकारों को भी अफगानिस्तान आने और अफगान लोगों व निजी क्षेत्र की कहानी दुनिया तक पहुंचाने का आग्रह किया है।

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