सेंट्रल रेलवे में हालिया विरोध-प्रदर्शन और उसके कारण मुंबई की लोकल ट्रेन सेवाओं में फैली भारी अव्यवस्था निर्माण हुई हुई थी, जिस पर जांच की रफ्तार बेहद धीमी चलाई जा रही है। सैंडहर्स्ट रोड स्टेशन पर हुई दो मौतों को सरकारी रेलवे पुलिस (GRP) द्वारा ‘एक्सिडेंटल’ कहे जाने के बाद लोकल यात्रियों में रोष बढ़ गया है, वहीं सीएसएमटी विरोध-प्रदर्शन मामले में भी किसी की गिरफ्तारी न होने पर पुलिस और रेलवे प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
दरअसल 6 नवंबर को मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CSMT) पर सेन्ट्रल रेलवे कर्मचारियों के प्रोटेस्ट के कारण भारी अफरा-तफरी पैदा हुई। शाम के व्यस्त घंटों में शुरू किए इस प्रदर्शन ने ट्रेन सेवाओं को लगभग एक घंटे तक ठप कर दिया, जिसके कारण कई स्टेशनों पर अत्यधिक भीड़ जमा हो गई। घोषणा न होने और लंबी देरी से परेशान यात्री पटरियों पर उतरकर विकल्प तलाशने लगे।
इसी दौरान सैंडहर्स्ट रोड स्टेशन के पास पटरियों पर चलते पाँच लोगों को एक कल्याण-गामी लोकल ने टक्कर मार दी, जिसमें 19 वर्षीय हेली मोहमया और 45 वर्षीय सुर्याकांत नाइक की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य घायल हुए।
सेन्ट्रल रेलवे प्रदर्शन की वजह दो इंजीनियरों पर GRP द्वारा दर्ज की गई FIR थी, जो जून 2025 में मुम्ब्रा में हुए एक अलग हादसे से जुड़ी थी। DRM ने हस्तक्षेप कर कर्मचारियों को आश्वासन देने के बाद सेवाएं बहाल की गई। घटना के बाद GRP ने 30–40 कर्मचारियों पर गैरकानूनी जमाव, रास्ता रोकने और सार्वजनिक सेवा बाधित करने जैसे आरोपों में मामला दर्ज किया, जिससे प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन पर नई बहस शुरू हो गई।
इसी बीच, इस मामले में आरोपी सेंट्रल रेलवे के इंजीनियर विषाल डोळस और समर यादव ने बॉम्बे हाई कोर्ट से 9 दिसंबर तक गिरफ्तारी से अंतरिम राहत हासिल कर ली है, जिससे यात्रियों के अविश्वास और असंतोष में और भी बढ़ा हुआ है।
मुम्ब्रा रेल हादसे की जांच भी GRP की सुस्ती और प्राथमिकताओं को लेकर सवालों में घिरी हुई है। 9 जून को हुए इस हादसे में पांच यात्रियों की मौत हुई थी, लेकिन चार महीने बाद भी जांच में कोई ठोस प्रगति नहीं दिख रही। पुलिस सूत्रों के अनुसार, GRP कमिश्नर राकेश कलासागर के प्रशिक्षण के लिए हैदराबाद जाने के दौरान कई महत्वपूर्ण पूछताछ और प्रक्रियाएं अधूरी छोड़ दी गईं, जिससे मामलों की गति लगभग ठप हो गई।
अब कमिश्नर की वापसी के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि जांच में तेजी आएगी, हालांकि यात्रियों के संगठनों का कहना है कि प्रशासन अब भी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश कर रहा है। मुंबई रेलवे प्रवासी संघ के अध्यक्ष मधु कोटियन ने GRP की आलोचना करते हुए कहा, “सैंडहर्स्ट रोड केस में वे रेलवे अधिकारियों को बचा रहे हैं। यदि ट्रैक पर चलना FIR को अमान्य बनाता है, तो जांच से पहले यह मानने का क्या तुक बनता है? घंटों तक ट्रेनें रुकी रहीं, यात्रियों को मजबूरी में पटरियों पर उतरना पड़ा इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुम्ब्रा मामले में इंजीनियरों की गिरफ्तारी हो सकती थी, लेकिन दबाव में पुलिस ने कार्रवाई टाल दी, जिससे उन्हें अदालत जाने का समय मिल गया।कोटियन के अनुसार, CSMT विरोध-प्रकरण में भी पुलिस टालमटोल कर रही है ताकि मामला धीरे-धीरे दब जाए।
अखंड कोंकण रेलवे प्रवासी सेवा समिति के सचिव अक्षय महापाड़ी ने भी GRP और रेलवे प्रशासन पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उन्होंने पूछा, “CSMT प्रदर्शन में RPF ने कोई मामला क्यों दर्ज नहीं किया? नामित यूनियन सदस्यों पर कौन सी विभागीय कार्रवाई हुई? अगर आम नागरिक ट्रेनें रोकते, तो तुरंत गिरफ्तारी होती, फिर यहां ऐसी रियायत क्यों?” महापाड़ी ने चेतावनी दी कि यात्री मजबूरी में ट्रैक पर उतरे, न कि विरोध के लिए।
प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि भीड़भाड़ और अफरातफरी की स्थिति किसने उत्पन्न की और जांच की प्रगति जनता के साथ पारदर्शी रूप से साझा करनी होगी, क्योंकि इन घटनाओं में जानें गई हैं और यात्रियों को जवाब चाहिए।
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