केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को भाजपा के केंद्रीय कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर तमिलनाडु हाईकोर्ट की मदुरै बेंच के उस फैसले का स्वागत किया, जिसमें तिरुपरनकुंद्रम पहाड़ियों पर सदियों पुरानी दीपम प्रज्वलन परंपरा को जारी रखने की अनुमति दी गई है। गोयल ने इसे श्रद्धालुओं की आस्था की जीत और धार्मिक स्वतंत्रता की पुष्टि बताया।
पीयूष गोयल ने कहा कि यह अत्यंत संतोषजनक है कि अदालत ने भगवान मुरुगन से जुड़े इस ऐतिहासिक स्थल पर ‘दीपोत्तिरुविझा’ के तहत दीप प्रज्वलन की परंपरा को मान्यता दी। उन्होंने कहा कि सदियों से चली आ रही इस धार्मिक परंपरा को रोकने का कोई औचित्य नहीं था और अदालत ने कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार के तर्कों को सख्ती से खारिज कर दिया है।
केंद्रीय मंत्री ने डीएमके और इंडिया गठबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि ये दल लगातार सनातन धर्म का अपमान करते रहे हैं और तुष्टीकरण की राजनीति के तहत धार्मिक परंपराओं को निशाना बना रहे हैं।
उन्होंने कहा कि न्यायमूर्ति जी. आर. स्वामिनाथन के आदेश के खिलाफ अपील दायर करना और उनके विरुद्ध महाभियोग प्रस्ताव लाना न्यायपालिका को डराने का प्रयास है।
गोयल ने कहा कि हाईकोर्ट के फैसले से डीएमके और इंडिया गठबंधन की असली मानसिकता उजागर हो गई है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि कानून-व्यवस्था का भय केवल एक “काल्पनिक तर्क” था। उन्होंने भरोसा जताया कि देश की जनता संविधान, आस्था और न्यायपालिका के साथ खड़ी रहेगी और तुष्टीकरण की राजनीति को स्वीकार नहीं करेगी।
प्रेस वार्ता में भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया प्रमुख अनिल बलूनी, सह-प्रमुख डॉ. संजय मयूख और राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. अजय आलोक भी मौजूद रहे।
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