बांग्लादेश में इस्लामी चरमपंथियों को अंतरिम सरकार द्वारा खुली छूट मिलने के बाद राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता बढ़ चुकी है, जिसके चलते गैर-मुस्लिम अल्पसंख्यांक, खासकर हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा लगातार जारी है। ताजा मामलों में, प्रसिद्ध हिंदू संगीतकार और अवामी लीग नेता प्रोलोय चाकी (60) की पुलिस हिरासत में मौत हो गई, जबकि 28 वर्षीय ऑटो-रिक्शा चालक समीर (समीयर) कुमार दास की एक भीड़ द्वारा पीट-पीटकर और चाकू मारकर हत्या कर दी गई। दोनों घटनाओं ने यूनुस सरकार के कार्यकाल में अल्पसंख्यक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की धज्जियाँ कैसे उडी है यह स्पष्ट किया है।
हिरासत में प्रोलोय चाकी की मौत
पाबना जिले के एक जाने-माने सांस्कृतिक कार्यकर्ता और गायक प्रोलोय चाकी पाबना जिला जेल में बंद थे। जेल प्रशासन के अनुसार, 9 जनवरी को उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई और उन्हें हृदयाघात हुआ। इसके बाद उन्हें पाबना जनरल अस्पताल ले जाया गया और हालत गंभीर होने पर राजशाही मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर किया गया, जहां रात करीब 9 बजे उनकी मृत्यु हो गई।
पाबना जिला जेल के अधीक्षक ओमर फारूक ने कहा, “प्रोलोय चाकी गंभीर मधुमेह, उच्च रक्तचाप और हृदय संबंधी बीमारियों से पीड़ित थे।” हालांकि, परिजनों ने इस आधिकारिक बयान को सिरे से खारिज किया है। परिवार का आरोप है कि प्रोले चाकी को महीनों तक उचित चिकित्सा सुविधा नहीं दी गई और जेल में उन्हें शारीरिक व मानसिक तौर पर प्रताड़ित किया जाता था।
उनके बेटे सनी चाकी ने कहा कि गंभीर बीमारियों के बावजूद उनके पिता को ICU के बजाय सामान्य बैरक में रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया, “मेरे पिता के खिलाफ कोई ठोस मामला नहीं था। उन्हें बिना वारंट गिरफ्तार किया गया और जरूरी इलाज से वंचित रखा गया।” सनी चाकी ने यह भी कहा, “जेल में उनकी हालत गंभीर हो गई थी, लेकिन अधिकारियों ने हमें आधिकारिक तौर पर सूचित नहीं किया। दूसरों से खबर मिलने पर हम अस्पताल पहुंचे, लेकिन उन्हें समय पर और सही इलाज नहीं मिला, जिससे उनकी मौत हो गई।”
परिवार और सहयोगियों का कहना है कि प्रोले चाकी को उनकी धार्मिक पहचान और राजनीतिक संबद्धता के कारण निशाना बनाया गया। पाबना सम्मिलित सांस्कृतिक जोत के सचिव भास्कर चौधरी ने कहा, “प्रोलोय चाकी अपनी राजनीतिक पहचान से परे एक सांस्कृतिक कार्यकर्ता और गायक थे। इस तरह उनकी मौत को हम स्वीकार नहीं कर सकते। यह पाबना के सांस्कृतिक क्षेत्र के लिए बड़ी क्षति है।” पूर्व पाबना ड्रामा सर्कल अध्यक्ष गोपाल सान्याल ने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की है। कई प्रमुख गायकों ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है।
प्रोलोय चाकी को 16 दिसंबर को पाबना शहर के दिलालपुर स्थित उनके घर से एक कथित 4 अगस्त विस्फोट मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में उन पर कई मामले दर्ज किए गए और तब से वे जेल में थे। अधिकारियों के अनुसार, कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंपा जाएगा।
समीर कुमार दास की भीड़ द्वारा हत्या:
दूसरी घटना 11 जनवरी की रात की है, जब चटगांव के दागनभुइयां इलाके में जिहादी भीड़ ने समीर कुमार दास की बेरहमी से पिटाई की और चाकू मारकर हत्या कर दी। समीर फेनी जिले के दागनभुइयां क्षेत्र में बैटरी-चालित ऑटो-रिक्शा चलाते थे। पुलिस के मुताबिक, हमलावर हत्या के बाद उनका वाहन भी लूट ले गए।
पुलिस ने बताया कि समीर उस रात ऑटो लेकर निकले थे और वापस नहीं लौटे। अगले दिन 12 जनवरी की सुबह उनका खून से सना शव मुहुरी बाड़ी गांव के पास एक खेत में मिला, जो एक उपजिला अस्पताल के निकट है। जांच में चाकू के घाव और गंभीर मारपीट के निशान पाए गए।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा, “समीर की हत्या देशी हथियारों से की गई और उसे पीट-पीटकर मारा गया। प्रथम दृष्टया यह एक सुनियोजित हत्या लगती है। हत्या के बाद ऑटो-रिक्शा भी लूट लिया गया। पीड़ित का परिवार प्राथमिकी दर्ज कराएगा और आरोपियों की पहचान व गिरफ्तारी के लिए अभियान शुरू कर दिया गया है।”
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बीते 42 दिनों में कम से कम 12 हिंदुओं की हत्या हो चुकी है। 18 दिसंबर को मैमनसिंह में दीपु चंद्र दास को सार्वजनिक रूप से जलाने और पीट-पीटकर मारने की घटना भी इसी श्रृंखला का हिस्सा बताई जा रही है। यह घटनाएं पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद बढ़ी अस्थिरता के बीच सामने आई हैं।
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