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Thursday, April 23, 2026
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भारतीय सेना को मिलेंगे और 300 ‘धनुष’ हॉवित्जर तोपें

तोपखाने की ताकत में बड़ा इजाफा

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भारतीय सेना अपनी आर्टिलरी क्षमता को मजबूत करने के लिए 300 स्वदेशी ‘धनुष’ हॉवित्जर तोपों की बड़ी खरीद की तैयारी में है। रक्षा मंत्रालय की उच्चस्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव को जल्द मंजूरी मिलने की संभावना है। इस सौदे के तहत 155 मिमी 45-कैलिबर की उन्नत तोपों से लैस 15 नई रेजिमेंट खड़ी की जाएंगी। यह ‘धनुष’ प्लेटफॉर्म के लिए दूसरा बड़ा ऑर्डर होगा। इससे पहले सेना 114 तोपों का ऑर्डर दे चुकी है, जिनसे चार रेजिमेंट पहले ही शामिल हो चुकी हैं और दो अन्य जल्द संचालन में लाई जाएंगी।

बोफोर्स तकनीक से स्वदेशी विकास तक:

‘धनुष’ का निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एडवांस्ड वेपन्स एंड इक्विपमेंट इंडिया लिमिटेड(AWEIL) कर रही है। यह तोप 1980 के दशक में खरीदी गई बोफोर्स FH-77 हॉवित्जर से प्राप्त तकनीक के आधार पर विकसित की गई है। विवादों के बावजूद बोफोर्स सौदे से मिली तकनीकी नींव ने स्वदेशी आर्टिलरी विकास का रास्ता खोला। ‘धनुष’ आधुनिक अपग्रेड्स से लैस है, जिसमें 155 मिमी गोला-बारूद संगतता और बाइ-मॉड्यूलर चार्ज सिस्टम (BMCS) शामिल है। यह प्रणाली 38 किलोमीटर से अधिक की प्रभावी मारक क्षमता प्रदान करती है, जो पुराने सिस्टम से कहीं बेहतर है।

जून 2018 में राजस्थान के पोखरण फील्ड फायरिंग रेंज में कठोर परीक्षणों के दौरान ‘धनुष’ ने रेगिस्तानी, उच्च हिमालयी और आर्द्र परिस्थितियों में अपनी विश्वसनीयता साबित की। इसे स्वदेशी ट्रकों से टो किया जा सकता है और यह डायरेक्ट व इनडायरेक्ट दोनों फायर मोड में सटीकता प्रदान करती है।

‘धनुष’ हॉवित्जर तोपों का रणनीतिक महत्व”

सेना की प्रत्येक रेजिमेंट में आमतौर पर 18 हॉवित्जर होते हैं। नए ऑर्डर से 15 रेजिमेंट सुसज्जित होंगी, जिन्हें नियंत्रण रेखा (LAC) और पश्चिमी सीमाओं पर तैनात किया जाएगा। इससे ‘धनुष’ की कुल संख्या 400 से अधिक हो जाएगी और यह सेना की 155 मिमी आर्टिलरी का मुख्य आधार बनेगी।

चीन द्वारा PCL-181 जैसे आधुनिक सिस्टम और पाकिस्तान द्वारा पश्चिमी डिजाइनों की प्रतिकृतियों की तैनाती के बीच ‘धनुष’ एक किफायती और परीक्षण-प्रमाणित विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

लागत और आत्मनिर्भरता: 

इस सौदे की अनुमानित लागत करीब 5,000 करोड़ रुपये बताई जा रही है। बड़े पैमाने पर ऑर्डर से प्रति यूनिट लागत कम होगी और 2028-2030 तक इनकी आपूर्ति पूरी करने का लक्ष्य है। अंबाजोगाई (महाराष्ट्र) स्थित यूनिट में 80% से अधिक पुर्जों की सोर्सिंग के साथ ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सिद्धांतों को लागू किया जा रहा है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि, ‘धनुष’ की बड़ी संख्या में तैनाती से सेना की मारक क्षमता और जवाबी फायर की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी, जिससे आधुनिक युद्धक्षेत्र में संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

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