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Friday, October 23, 2026
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बलूचिस्तान में महिलाओं पर दमन, पाक सेना पर मानवाधिकार संगठनों का आरोप!

संगठन का कहना है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा बलूच महिलाओं को जबरन गायब किए जाने की घटनाएं व्यापक और सुनियोजित दमन तथा सामूहिक सजा की नीति को दर्शाती हैं।

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एक प्रमुख मानवाधिकार संगठन ने मंगलवार को बलूचिस्तान में 2025 के दौरान लैंगिक आधार पर मानवाधिकार उल्लंघनों में तेज वृद्धि पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन का कहना है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा बलूच महिलाओं को जबरन गायब किए जाने की घटनाएं व्यापक और सुनियोजित दमन तथा सामूहिक सजा की नीति को दर्शाती हैं।

‘बलूच यकजेहती कमेटी’ (बीवाईसी) ने अपनी थीमैटिक रिपोर्ट ‘2025 में बलूच महिलाओं की जबरन गुमशुदगी: बलूचिस्तान में सामूहिक दंड और लैंगिक मानवाधिकार उल्लंघन’ में कहा कि हालांकि पहले भी जबरन गुमशुदगी का शिकार अधिकतर बलूच पुरुष होते रहे हैं, लेकिन 2025 में महिलाओं और लड़कियों को सीधे निशाना बनाए जाने की घटनाओं में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 के दौरान बलूचिस्तान के विभिन्न जिलों में महिलाओं और लड़कियों से जुड़े कम से कम 12 जबरन गुमशुदगी के मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में बिना गिरफ्तारी वारंट, न्यायिक निगरानी या किसी वैध कानूनी आधार के लोगों को हिरासत में लेने का एक समान पैटर्न सामने आया है। इसके बाद संबंधित एजेंसियों द्वारा हिरासत से इनकार या पीड़ितों के ठिकाने और हालात के बारे में जानकारी देने से मना किया गया।

बीवाईसी ने बताया कि कई मामलों में एक ही अभियान के दौरान परिवार के एक से अधिक सदस्यों को निशाना बनाया गया, जिससे पूरे परिवार पर गंभीर मानसिक और सामाजिक प्रभाव पड़ा। संगठन के अनुसार, ये घटनाएं पाकिस्तान की सुरक्षा कार्रवाइयों, काउंटर-इंसर्जेंसी उपायों और सैन्यीकृत शासन के व्यापक संदर्भ में सामने आई हैं, जहां बलूच महिलाएं अब अप्रत्यक्ष नहीं बल्कि प्रत्यक्ष रूप से राज्य हिंसा का शिकार बन रही हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि महिलाओं की जबरन गुमशुदगी केवल व्यक्तिगत अधिकारों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि इसके दूरगामी सामाजिक परिणाम होते हैं। इससे परिवार अस्थिर होते हैं, सामुदायिक ढांचे टूटते हैं और भय, चुप्पी तथा सामाजिक विघटन का माहौल बनता है।

कई मामलों में महिलाओं को उनके पुरुष रिश्तेदारों या पूरे परिवार पर दबाव बनाने के लिए निशाना बनाया गया, जो दमन के एक विशिष्ट लैंगिक स्वरूप को दर्शाता है।

बीवाईसी के अनुसार, जबरन गुमशुदगी की घटनाओं के साथ बार-बार घरों पर छापे, धमकियां और परिवारों को डराने-धमकाने की कार्रवाइयां भी देखी गईं। कई घरों की तलाशी ली गई, संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया या जब्त किया गया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि दंडात्मक कदम केवल पीड़ित तक सीमित नहीं रहे।

मानवाधिकार संगठन ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से स्थिति पर तत्काल निगरानी रखने की अपील करते हुए कहा कि ये प्रथाएं पाकिस्तान के संवैधानिक प्रावधानों और अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन हैं तथा परिवारों और समुदायों को दीर्घकालिक नुकसान पहुंचा रही हैं।

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