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केरल: जनसांख्यिक बदलाव के बाद मुस्लिम जमाअत मांग रही है एर्नाकुलम ज़िले का विभाजन

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केरल में मुस्लिम जमाअत ने एर्नाकुलम जिले के विभाजन की मांग को रखना शुरू है। संगठन का कहना है कि जिले में हुए जनसांख्यिक बदलावों और बदलती सामाजिक वास्तविकताओं को देखते हुए प्रशासनिक पुनर्गठन अब आवश्यक हो गया है। जमाअत ने प्रस्ताव रखा है कि एर्नाकुलम से अलग एक नया जिला बनाया जाए, जिसका मुख्यालय मुवत्तुपुझा हो।

सोमवार (12 जनवरी) को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए संगठन के नेताओं ने कहा कि यह मांग उनके राज्यव्यापी यात्रा (यात्रा अभियान) के दौरान जनता से हुए संवाद से उभरकर सामने आई है। जमाअत इस प्रस्ताव को औपचारिक रूप से केरल सरकार के समक्ष रखने वाली है। संगठन ने यह भी कहा कि इसी तरह की प्रशासनिक और जनसंख्या संबंधी चुनौतियां मलप्पुरम जिले में भी मौजूद हैं, जहां जिले के विभाजन पर विचार किया जाना चाहिए।

केरल मुस्लिम जमाअत का तर्क है कि बड़े और घनी आबादी वाले जिलों में प्रशासनिक दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे संतुलित विकास, प्रभावी शासन और नागरिक सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। संगठन के अनुसार, मुवत्तुपुझा को मुख्यालय बनाकर नया जिला गठित करने से क्षेत्रीय असंतुलन दूर होगा और दूर-दराज़ के इलाकों तक सरकारी सेवाओं की पहुंच बेहतर होगी।

बता दें की, 2011 की जनगणना के अनुसार एर्नाकुलम जिले (2011) में हिंदू धर्म के अनुयायी सबसे बड़े समूह थे, जिनकी संख्या कुल जनसंख्या का 45.99% थी। इसके बाद ईसाई समुदाय का स्थान था, जो 38.03% थे, और मुस्लिम समुदाय तीसरे स्थान पर था, जिसकी हिस्सेदारी 15.67% थी। इसके अलावा सिक्ख, बौद्ध और जैन धर्म के अनुयायी भी जिले में मौजूद थे, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम थी। हालांकि 2026 के सटीक आंकड़े नहीं है पर मुस्लिम आबादी 25% से भी अधिक होने के दावे अक्सर किए जाते है, जिससे यह मांग और भी चिंताजनक होती है।

प्रशासनिक पुनर्गठन की मांग के साथ-साथ जमाअत ने कई अन्य मुद्दों को उठा रही है। संगठन ने एर्नाकुलम को एक प्रमुख शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित करने की जरूरत बताई। इसके अलावा, युवाओं को नष्ट कर रहे नशीले पदार्थों के नेटवर्क पर सख्त कार्रवाई, पेरियार नदी में बढ़ते प्रदूषण पर नियंत्रण, और कलामस्सेरी स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज में इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टाफ की कमी को तत्काल दूर करने की मांग भी की गई।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में केरल मुस्लिम जमाअत के नेता सैयद इब्राहिमुल खलील अल बुखारी और पेरोड अब्दुरहमान साकाफी, संगठन के सचिव सी पी सैथलवी मास्टर, एर्नाकुलम जिला अध्यक्ष वी एच अली दरीमी और जिला सचिव सी टी हाशिम थंगल मौजूद थे।

प्रेस वार्ता के दौरान हाल में मराड दंगों को लेकर आई राजनीतिक टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया दी गई। सैयद इब्राहिमुल खलील अल बुखारी ने कहा कि इस समय पुराने जख्मों को कुरेदने का कोई औचित्य नहीं है। उनकी यह टिप्पणी CPI(m) नेता ए. के. बालन के उस बयान के संदर्भ में आई, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर यूडीएफ सत्ता में लौटी तो मराड जैसी हिंसा फिर हो सकती है।

पेरोड अब्दुरहमान साकाफी ने भी बालन के बयान को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए कहा कि इस मुद्दे पर जमाअत की ओर से और कुछ कहने की जरूरत नहीं है। संगठन का कहना है कि समाज को आगे बढ़ने और विकास के मुद्दों पर केंद्रित रहने की आवश्यकता है।

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