रूस ने मंगलवार (3 फरवरी)को कहा है की उसने भारत की ओर से रूस से तेल की खरीद बंद करने संबंधी कोई आधिकारिक या स्पष्ट बयान नहीं सुना है और वह नई दिल्ली के साथ अपने रणनीतिक साझेदारी रिश्ते को विकसित करने का इरादा रखता है। दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का ऐलान करते हुए दावा किया था कि भारत ने रूसी तेल की खरीद रोकने पर सहमति जताई है।
ट्रंप ने सोमवार (2 फरवरी) को घोषणा की थी कि भारत और अमेरिका के बीच हुआ व्यापार समझौता भारतीय सामान पर अमेरिकी टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर देगा और इसके बदले भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर देगा तथा अमेरिका से अधिक खरीद करेगा। ट्रंप ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी मित्रता और सम्मान के परिणाम के रूप में पेश किया था।
इस पर क्रीमलिन के प्रवक्ता दिमित्रि पेस्कोव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि अब तक नई दिल्ली की ओर से इस मामले पर कोई बयान नहीं मिला है और यह भी दोहराया कि रूस भारत के साथ अपने व्यापक और ‘उन्नत’ रणनीतिक साझेदारी संबंधों को और आगे बढ़ाना चाहता है। पेस्कोव ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग पर दशकों से स्थापित विश्वास और साझेदारी बनी रहेगी।
रूस का यह रुख संकेत देता है कि ट्रंप के दावे और अमेरिका-भारत व्यापार डील के संदर्भ में तेल खरीद बंद करने का कोई औपचारिक समझौता अभी तक सार्वजनिक तौर पर नहीं हुआ है, या रूस को उसके बारे में कोई आधिकारिक संचार प्राप्त नहीं हुआ है। वहीं, भारत ने भी अभी तक इस बात का खुलासा नहीं किया है कि उसने रूस से तेल की खरीद रोकने या उसे सीमित करने का कोई निर्णय लिया है।
भारत ने 2022 के बाद से रूस से कच्चे तेल का व्यापक रूप से आयात किया है और यह अब तक देश के ऊर्जा आपूर्ति में एक बड़ा हिस्सा है, जो भारत को पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद किफायती ऊर्जा सुरक्षा प्रदान करता रहा है।
रूस-भारत के रणनीतिक सहयोग पर जोर देते हुए पेस्कोव ने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, ऊर्जा और आर्थिक साझेदारी को आगे बढ़ाने की दिशा में काम जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि आर्थिक और राजनीतिक फैसले देशों के राष्ट्रीय हितों पर आधारित होते हैं, और रूस इस रिश्ते को महत्व देता है।



