बांग्लादेश में तारिक रहमान के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद दोनों देशों के संबंधों में सुधार के संकेत दिखाई देने लगे हैं। बांग्लादेश ने भारत में अपने सभी मिशनों पर भारतीय नागरिकों के लिए पूर्ण वीज़ा और कांसुलर सेवाएं फिर से शुरू कर दी हैं। इसके जवाब में भारत सरकार ने भी बांग्लादेशी नागरिकों के लिए जल्द ही सभी श्रेणियों की वीज़ा सेवाएं बहाल करने की घोषणा की है।
ढाका के निर्देश पर नई दिल्ली स्थित बांग्लादेश उच्चायोग तथा अगरतला और सिलीगुड़ी में सहायक उच्चायोगों ने शुक्रवार (20 फरवरी) की सुबह से पर्यटक, चिकित्सा, व्यवसाय, कार्य और अन्य सभी प्रकार के वीज़ा आवेदनों की प्रक्रिया फिर शुरू कर दी। इससे 22 दिसंबर 2025 से लागू निलंबन समाप्त हो गया है, जब सुरक्षा चिंताओं और राजनयिक परिसरों के बाहर प्रदर्शनों के कारण सेवाएं रोकी गई थीं।
यह फैसला 17 फरवरी को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारीक रहमान के प्रधानमंत्री पद संभालने के तीन दिन बाद लिया गया है। हालिया आम चुनाव में जीत के बाद उनकी सरकार ने कार्यभार संभाला है। इससे पहले मुहम्मद यूनुस के अंतरिम प्रशासन के दौरान भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव बढ़ गया था और कांसुलर सेवाओं पर प्रतिबंध लगाए गए थे।
विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम नई सरकार द्वारा नई दिल्ली के साथ संबंधों को पुनर्संतुलित करने की दिशा में पहला ठोस प्रयास है। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, चिकित्सा यात्रा और पारिवारिक आवागमन को राहत मिलने की उम्मीद है। हर वर्ष हजारों भारतीय नागरिक चिकित्सा, शिक्षा और व्यवसायिक कारणों से बांग्लादेश जाते हैं, जबकि बड़ी संख्या में बांग्लादेशी नागरिक भी भारत आते रहे हैं।
पारस्परिक कदम के तहत भारत ने भी संकेत दिया है कि वह जल्द ही बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पूर्ण वीज़ा सेवाएं बहाल करेगा। सिलहट में भारत के सहायक उच्चायुक्त अनिरुद्ध दास ने स्थानीय मीडिया को बताया कि चिकित्सा और डबल-एंट्री वीज़ा पहले ही जारी किए जा रहे हैं और अन्य श्रेणियों, जिनमें यात्रा वीज़ा भी शामिल हैं उन्हें फिर से शुरू करने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि दोनों देश पारस्परिक सम्मान के आधार पर द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
भारत ने 8 अगस्त 2024 को पहली बार वीज़ा सेवाएं निलंबित की थीं, जब जुलाई आंदोलन और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के भारत आने के बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। बाद में सेवाएं आंशिक रूप से बहाल हुईं, लेकिन नवंबर में इस्लामी कट्टरपंथी नेता उस्मान हादी की हत्या को लेकर विरोध प्रदर्शनों के बाद ढाका, खुलना, चिटगांव और राजशाही स्थित वीज़ा आवेदन केंद्र बंद कर दिए गए थे।
इसके जवाब में बांग्लादेश ने भी नई दिल्ली, कोलकाता और अगरतला समेत कई शहरों में अपने वीज़ा केंद्र बंद कर दिए थे, यह कहते हुए कि बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ बढ़ती हिंसा के विरोध में प्रदर्शन हो रहे थे। अब नई राजनीतिक परिस्थितियों में दोनों देशों द्वारा वीज़ा सेवाओं की बहाली को द्विपक्षीय संबंधों में सुधार की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि यह रफ्तार बनी रहती है तो व्यापार, संपर्क और क्षेत्रीय सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है।
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