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Thursday, May 21, 2026
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Mumbai: महानगरपालिका में उजागर हुए 87,000 फर्जी जन्म-प्रमाणपत्रों की गड़बड़ी

24 वार्डों में समानांतर डेटा सिस्टम का खुलासा

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महाराष्ट्र में फर्जी जन्म प्रमाणपत्रों के खिलाफ शुरू हुई कार्रवाई ने अब बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) के भीतर एक बड़े डेटा घोटाले का रूप में उजागर हुई है। BMC की आंतरिक जांच में शहर के सभी 24 वार्डों में जन्म और मृत्यु पंजीकरण प्रणाली में गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। अधिकारियों के मुताबिक, आधिकारिक सिस्टम के समानांतर एक शैडो डेटा पाइपलाइन संचालित की जा रही थी।

जांच में सामने आया कि जिन्हें केवल सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (CRS) के माध्यम से रिकॉर्ड में सुधार करने का अधिकार ऐसे मेडिकल ऑफिसर ऑफ हेल्थ (MOH) ने एक पुराने आंतरिक प्लेटफॉर्म SAP-CPWM पर भी समानांतर रूप से बदलाव किए थे। यह प्रक्रिया भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों का सीधा उल्लंघन है और इससे डेटा की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

आंकड़े इस गड़बड़ी की गंभीरता का स्वरुप दिखाते हैं। वर्ष 2024 से 2026 के बीच SAP सिस्टम के जरिए 87,000 से अधिक बदलाव किए गए, जबकि आधिकारिक CRS पोर्टल पर केवल 33,772 प्रविष्टियां दर्ज हुईं। प्रशासनिक दृष्टि से यह अंतर एक समानांतर और अनधिकृत रिकॉर्ड निर्माण किया गया है।

यह रिपोर्ट BMC आयुक्त अश्विनी भिड़े को सौंपी गई, जिसे मंजूरी भी मिल चुकी है। रिपोर्ट में सिर्फ अनियमितताओं की पहचान ही नहीं, बल्कि कड़ी कार्रवाई की सिफारिश भी की गई है। फर्जी प्रमाणपत्र मामले में अब एक और MOH के निलंबन की बात सामने आई है, जबकि कई अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है। एल और ई वार्ड के पूर्व MOH डॉ. शैलेंद्र गुजर का नाम विशेष रूप से रिपोर्ट में शामिल है। इससे पहले एम-ईस्ट वार्ड के दो MOH और दो क्लर्क निलंबित किए जा चुके हैं और उनके खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है।

जांच में ई वार्ड में जन्म पंजीकरण से जुड़े मामलों में प्राथमिक तौर पर अनियमितताओं के प्रमाण मिले हैं, जबकि एल वार्ड में अलग से जांच जारी है। इसके साथ ही प्रशासनिक स्तर पर फेरबदल भी शुरू हो गया है। के-वेस्ट, आर-नॉर्थ और ई वार्ड में, जहां रिकॉर्ड दर्ज कराने की संख्या असामान्य रूप से अधिक पाई गई। यहां तैनात MOH का चरणबद्ध तरीके से तबादला किया जाएगा।

BMC ने इस खामी को दूर करने के लिए तुरंत कदम उठाए हैं। SAP आधारित सभी प्रविष्टियों को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया गया है और IT विभाग को MOH को दिए गए एक्सेस अधिकार वापस लेने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, वार्ड स्तर पर MOH की जिम्मेदारियों के पुनर्गठन की योजना भी बनाई जा रही है ताकि जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके।

गौरतलब है कि इस पूरे मामले को सबसे पहले पूर्व भाजपा सांसद किरीट सोमैया ने 2024-25 के दौरान उठाया था। ताजा घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने इस कार्रवाई को अभूतपूर्व बताया और प्रशासन द्वारा समस्या की गंभीरता को स्वीकार करने की सराहना की।

यह पूरा मामला सिर्फ प्रशासनिक लापरवाही तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि किस तरह समानांतर व्यवस्थाएं आधिकारिक प्रक्रियाओं को कमजोर कर रही थीं। फर्जी प्रमाणपत्रों से शुरू हुई यह जांच अब शहरी प्रशासन में गहरे स्तर पर सुधार की जरूरत को उजागर कर रही है।

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