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पश्चिम बंगाल: विधानसभा चुनाव से पहले 480 सीएपीएफ कंपनियों होंगी तैनात

चुनाव आयोग ने प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने को कहा

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पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षा व्यवस्था को अभूतपूर्व स्तर पर मजबूत करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 480 केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) कंपनियों की प्रारंभिक तैनाती को मंजूरी दे दी है। 20 फरवरी को घोषित इस फैसले का उद्देश्य क्षेत्र वर्चस्व स्थापित करना, मतदाताओं में विश्वास बहाल करना और चुनावी प्रक्रिया, विशेषकर ईवीएम, स्ट्रॉन्ग रूम और मतगणना केंद्रों की सुरक्षा को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण ढंग से सुनिश्चित करना है।

यह तैनाती दो चरणों में होगी। 1 मार्च तक 240 कंपनियां राज्य में पहुंचेंगी, जिनमें 110 केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), 55 सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), 21 केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), 27 भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और 27 सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) की होंगी। दूसरी खेप में 10 मार्च तक अतिरिक्त 240 कंपनियां भेजी जाएंगी, जिनमें 120 सीआरपीएफ, 65 बीएसएफ, 16 सीआईएसएफ, 20 आईटीबीपी और 19 एसएसबी की कंपनियां शामिल रहेंगी।

इस व्यापक तैनाती को गृहमंत्रालय की स्वीकृति मिली है, जबकि बलों की आवाजाही और तैनाती का समन्वय सीआरपीएफ करेगा। राज्य प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वह सीएपीएफ और मुख्य बल समन्वयक के साथ मिलकर विस्तृत तैनाती योजना तैयार करे। प्रत्येक कंपनी में नौ सेक्शन होंगे। आठ मतदान केंद्रों पर और एक क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) व पर्यवेक्षण कार्यों के लिए आरक्षित रहेगा।

आयोग ने सभी जिलों को संवेदनशील और अतिसंवेदनशील बूथों तथा क्षेत्रों की पहचान करने के निर्देश दिए हैं। पिछले चुनावों में हुई हिंसा और दैनिक कानून-व्यवस्था की स्थिति के आधार पर सात जिले कूचबिहार, उत्तर दिनाजपुर, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, मालदा, मुर्शिदाबाद और बीरभूम को अत्यधिक संवेदनशील माना गया है।

28 फरवरी को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद मतदाता सूची जारी की जानी है। इस प्रक्रिया को लेकर राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार और ECI के बीच विवाद की स्थिति बनी रही है। 20 फरवरी को सर्वोच्च न्यायलय ने हस्तक्षेप करते हुए विश्वास की कमी और दुर्भाग्यपूर्ण आरोप-प्रत्यारोप का उल्लेख किया तथा न्यायिक अधिकारियों की तैनाती का आदेश दिया। अदालत ने कलकत्ता के उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश को इस समन्वय की जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि मसौदा मतदाता सूची से नाम गायब होने की शिकायतों का समाधान किया जा सके।

पश्चिम बंगाल में 2014 के बाद से हुए सात प्रमुख चुनावों में हिंसा की घटनाओं के मद्देनजर इतनी बड़ी संख्या में केंद्रीय बलों की तैनाती की जा रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में 1,100 कंपनियां आठ चरणों में तैनात की गई थीं। इस बार राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी का कार्यालय एक या अधिकतम दो चरणों में मतदान कराने की वकालत कर रहा है, जिसके लिए अनुमानित रूप से 2,000 कंपनियों तक की आवश्यकता पड़ सकती है। अंतिम निर्णय बलों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा।

ECI ने संकेत दिया है कि जमीनी स्थिति की समीक्षा के बाद अतिरिक्त बलों की तैनाती पर भी विचार किया जा सकता है, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष, स्वतंत्र और शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

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