राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को अक्सर राजनीतिक नजरिए से देखा जाता है, जबकि इसके कार्यों को समझने के लिए संगठन की सेवा गतिविधियों और सामाजिक योगदान पर भी ध्यान देना जरूरी है। यह कहना है ‘हंड्रेड ईयर्स यंग: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ की लेखिका रश्मि सामंत का। आईएएनएस के साथ विशेष बातचीत में उन्होंने कहा कि संघ को लेकर समाज में कई गलतफहमियां हैं और संगठन को करीब से जानने वाले लोगों के अनुभव उसकी एक अलग तस्वीर सामने लाते हैं।
रश्मि सामंत के अनुसार, उनकी पुस्तक का उद्देश्य उन लोगों के अनुभवों को सामने लाना है, जो शुरुआत में आरएसएस के बारे में अलग धारणा रखते थे, लेकिन संगठन के संपर्क में आने के बाद उनके विचारों में बदलाव आया। पुस्तक में 20 युवा और प्रतिभाशाली लेखकों के अनुभवों को शामिल किया गया है।
इनमें भारतीयों के साथ ब्रिटिश, इजरायली और अमेरिकी योगदानकर्ता भी हैं। पुस्तक में हिंदू, ईसाई, मुस्लिम और यहूदी समुदायों के साथ-साथ एलजीबीटीक्यूआईए प्लस समुदाय से जुड़े लोगों के दृष्टिकोण भी शामिल किए गए हैं।
पुस्तक के शीर्षक की व्याख्या करते हुए सामंत ने कहा कि आरएसएस की शाखाओं में आज भी युवा खेलकूद, शारीरिक गतिविधियों और बौद्धिक चर्चाओं में भाग लेते हैं। पुस्तक में योगदान देने वाले सभी लेखक 40 वर्ष से कम उम्र के हैं, जिनमें अधिकांश की उम्र 30 वर्ष से भी कम है।
आरएसएस के सामाजिक योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने भूकंप, बाढ़, कोविड-19 महामारी और अन्य संकटों के दौरान स्वयंसेवकों की भूमिका की चर्चा की। उनके मुताबिक, शिक्षा, राहत कार्य, संस्कृति संरक्षण, आदिवासी समुदायों के साथ काम और सामाजिक समरसता जैसे क्षेत्रों में भी संघ से जुड़े संगठनों की गतिविधियां रही हैं। उन्होंने कहा कि संगठन के कार्यों का मूल्यांकन नारों या धारणाओं के बजाय तथ्यों, अनुभवों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
भारत के युवाओं पर चर्चा करते हुए सामंत ने कहा कि युवा राष्ट्र-निर्माण, नवाचार और सकारात्मक पहलों में योगदान दे रहे हैं। उन्होंने स्काईरूट के अंतरिक्ष क्षेत्र में किए गए प्रयासों का उदाहरण दिया। उनका मानना है कि नकारात्मक खबरों को अधिक ध्यान मिलने के कारण युवाओं के रचनात्मक कार्यों को अपेक्षित जगह नहीं मिल पाती।
सामंत ने यह भी कहा कि अलग-अलग विचारधाराओं के लोगों के बीच संवाद और रचनात्मक बहस जरूरी है। उनके अनुसार, आरएसएस को समझने के लिए लोगों को उसके पिछले सौ वर्षों के कार्यों और योगदान के बारे में जानने के बाद अपनी राय बनानी चाहिए।
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