बिहार के प्रसिद्ध सिद्धपीठ थावे दुर्गा मंदिर में गुरुवार को चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मंगला आरती श्रृंगार के बाद मां सिंहासन का दरबार आम श्रद्धालुओं के लिए खोल दिया गया। सुबह से ही यह पूरा परिसर मां के जयकारों से गूंजता रहा।
नेपाल, यूपी, बिहार के विभिन्न हिस्सों से आए भक्तों की आस्था तेज धूप भी नहीं डिगा सकी। कतार में लगे भक्तों का कदम गर्भगृह की ओर दिनभर बढ़ता जा रहा था।
मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित संजय पांडेय ने बताया कि मां के दर्शन मात्र से ही रोग, शोक, कष्ट का नाश होता है। सुख, समृद्धि, शांति, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। थावे दुर्गा मंदिर की स्थापना की कहानी भी काफी रोचक है।
इस पर रहषु ने राजा से कहा कि यदि माता यहां आईं तो वह राज्य का नाश कर देंगी। रहषु भक्त के आह्वान पर देवी मां कामरूप कामाख्या से चलकर पटना और सारण के आमी से होते हुए गोपालगंज के थावे पहुंचीं। माता ने रहषु का मस्तक चीर कर कंगन का दर्शन कराया जिसके बाद जिद्दी राजा की सभी इमारतें ढह गईं। राजा की मृत्यु हो गई। इस मंदिर में भक्त रहषु की भी प्रतिमा है, जहां मां की पूजा के बाद पूजा करने जाते हैं और उनका भी आशीर्वाद लेते हैं।
मंदिर के पुजारियों के मुताबिक, मां सिंहासिनी के दरबार में सतचंडी, सप्तशती और विभिन्न अनुष्ठानों की शुरुआत संकल्प के साथ शुरू हो गई। सैकड़ों की संख्या में आचार्यों और पुजारियों के द्वारा वेद मंत्रों का उच्चारण हो रहा है। दूर-दूर से आए साधकों ने भी अपना अनुष्ठान शुरू कर दिया है। तंत्र साधना से लेकर वैदिक साधना तक की जा रही है।
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