आईएएनएस के साथ बातचीत में नरवणे ने कहा कि सीमा पर किसी भी तरह की कार्रवाई केवल सेना का काम नहीं होती, बल्कि यह पूरे देश का सामूहिक प्रयास होता है। उन्होंने बताया कि जब भी ऐसी स्थिति आती है, तो अलग-अलग एजेंसियां और संस्थाएं मिलकर काम करती हैं, तभी सफलता मिलती है।
उन्होंने कहा कि भारत ने एकजुट होकर जवाब दिया, जिसकी वजह से चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को पीछे हटना पड़ा। हमारी कार्रवाई का ही परिणाम था कि चीन को अपनी स्थिति बदलनी पड़ी। अगर यह जीत नहीं है, तो और क्या है?
नरवणे ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय सेना पूरी तरह सक्षम है और किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि सीमा पर जो भी कदम उठाए गए, वे पूरी रणनीति और समन्वय के साथ किए गए थे, जिससे भारत को बढ़त मिली।
मनोज मुकुंद नरवणे ने ईरान, इजराइल और अमेरिका के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि हर युद्ध से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। असली सीख तब मिलती है जब युद्ध खत्म हो जाता है और हम उसका विश्लेषण करते हैं।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला। इस बार हमने सिर्फ आतंकवादी ठिकानों को निशाना नहीं बनाया, बल्कि उनके नेतृत्व के मुख्यालय को भी टार्गेट किया।
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