पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों में उत्तर 24 परगना जिले की पानीहाटी सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार रत्ना देबनाथ ने उल्लेखनीय जीत दर्ज की है। पहली बार चुनाव लड़ रहीं देबनाथ ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के प्रत्याशी तीर्थंकर घोष को 28,836 वोटों के अंतर से हराया। देबनाथ को कुल 87,977 वोट मिले, जबकि घोष को 59,141 मत प्राप्त हुए।
रत्ना देबनाथ की बेटी 2024 में कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज और अस्पताल में हुए दुष्कर्म और हत्या मामले की पीड़िता थी। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और राज्यभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। मामले में टीएमसी कार्यकर्ता मुख्य आरोपी था, इसके अलावा पुलिस की अकार्यक्षमता को लेकर ममता बनर्जी सरकार को जनता से तीखी आलोचना का सामना करना पड़ा, ममता बॅनर्जी के समर्थकों ने कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों पर हमलें किए जिससे आरजी कर अस्पताल का मुद्दा लंबे समय तक जनता के बीच चर्चा का केंद्र बना रहा।
चुनाव प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पानीहाटी में एक रैली को संबोधित करते हुए महिलाओं की सुरक्षा को प्रमुख मुद्दा बनाया। इस दौरान रत्ना देबनाथ उनके साथ मंच पर मौजूद थीं, जो इस चुनावी रणनीति का प्रतीकात्मक और राजनीतिक दोनों रूप से महत्वपूर्ण संकेत था। चुनाव परिणामों ने यह दिखाया कि यह रणनीति प्रभावी रही।
अपनी जीत के बाद रत्ना देबनाथ ने कहा, “यह जीत पानीहाटी की जनता और पूरे बंगाल की जीत है। मैं इस जीत को प्रधानमंत्री मोदी को समर्पित करती हूं। मैंने घोष परिवार के कुशासन से लोगों को मुक्त कराने का काम किया है। मैं जनता का आभार व्यक्त करती हूं, यह मैं अकेले नहीं कर सकती थी।”
बीजेपी द्वारा देबनाथ को पानीहाटी जैसी टीएमसी के गढ़ मानी जाने वाली सीट से उम्मीदवार बनाना एक सोची-समझी रणनीति थी। पार्टी ने आरजी कर मामले को महिला सुरक्षा के बड़े मुद्दे के रूप में पेश करते हुए टीएमसी के पारंपरिक महिला वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की। वहीं, टीएमसी ने लक्ष्मी भंडार जैसी योजनाओं के जरिए महिलाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने का प्रयास किया था, जो महिला सुरक्षा के मुद्दों के सामने कमजोर पड़ गया।
इस बीच, संदेशखाली आंदोलन से उभरीं रेखा पात्रा ने भी हिंगलगंज विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की है। उन्होंने टीएमसी के आनंद सरकार को 5,421 वोटों से हराया। पात्रा को 1,00,207 वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंदी को 94,786 मत प्राप्त हुए। यह उनकी पहली विधानसभा जीत है, जबकि इससे पहले वह 2024 के लोकसभा चुनाव में पराजित हुई थीं।इन परिणामों से स्पष्ट है कि इस बार के चुनाव में महिला सुरक्षा और हालिया घटनाओं से उपजा जनाक्रोश एक महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बनकर उभरा, जिसने कई सीटों पर परिणामों को प्रभावित किया।
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