पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने सोमवार (8 जून) को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बाहुबली नेता और फाल्टा विधानसभा क्षेत्र से पूर्व उम्मीदवार रहे जहांगीर खान को नेपाल सीमा के निकट से गिरफ्तार कर लिया। अधिकारियों के अनुसार, खान पिछले कई दिनों से फरार चल रहा था और उसकी गतिविधियों पर खुफिया एजेंसियां लगातार नजर रखे हुए थीं।
पुलिस के मुताबिक, जहांगीर खान की गिरफ्तारी एक विशेष अभियान के दौरान की गई। एसटीएफ को उसके संभावित ठिकानों और आवाजाही से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिली थीं, जिसके आधार पर उसे नेपाल सीमा क्षेत्र के पास से हिरासत में लिया गया। गिरफ्तारी के बाद उसे आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए संबंधित एजेंसियों को सौंप दिया गया है।
जहांगीर खान हाल के स्थानीय चुनावों के दौरान चर्चा में आया था। चुनाव प्रचार के दौरान वह खुद को “पुष्पा” बताकर पुलिस पर धौस जमाने की कोशिश कर रहा था। हालांकि बाद में उसका नाम कथित चुनावी अनियमितताओं और धमकी से जुड़े मामलों में सामने आया, जिसके बाद वह कानून प्रवर्तन एजेंसियों के रडार पर आ गया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा थाने में जहांगीर खान के खिलाफ कुल सात प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। इन मामलों में चुनावी गड़बड़ी, धमकी और अन्य आरोप शामिल हैं। सबसे चर्चित आरोप इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से कथित छेड़छाड़ का है।
जांच एजेंसियों का दावा है कि दक्षिण 24 परगना क्षेत्र में कुछ ईवीएम पर भाजपा और कम्युनिस्ट पार्टी के उम्मीदवारों के चुनाव चिन्ह के ऊपर टेप चिपकाकर मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की थी। इसी मामले को लेकर दर्ज शिकायतों के आधार पर जांच शुरू हुई और बाद में कई एफआईआर दर्ज की गईं। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक और जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
जहांगीर खान फाल्टा विधानसभा क्षेत्र से टीएमसी का उम्मीदवार था। इस सीट पर ईवीएम से छेड़छाड़ के आरोपों के बाद 21 मई को पुनर्मतदान कराया गया था। पुनर्मतदान से कुछ दिन पहले ही खान ने चुनावी मुकाबले से अपना नाम वापस ले लिया था, जिससे राजनीतिक हलकों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
पुनर्मतदान के बाद भाजपा ने इस सीट पर रिकॉर्ड अंतर से जीत दर्ज की, जिससे पार्टी के बहुमत के आंकड़े में और बढ़ोतरी हुई। वहीं, चुनावी प्रक्रिया के दौरान और उसके बाद जहांगीर खान सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आया। बताया जाता है कि उसने अपना कार्यालय बंद कर दिया था और उसके बाद से उसका कोई स्पष्ट पता नहीं चल पा रहा था।
अब एसटीएफ की कार्रवाई के बाद मामले की जांच नए चरण में प्रवेश कर गई है। पुलिस का कहना है कि दर्ज सभी मामलों की गहन जांच जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ से चुनावी गड़बड़ी और अन्य आरोपों से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।
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