भाजपा नेतृत्व इसे अपनी परंपरागत सीट मानते हुए किसी तरह की चूक नहीं चाहता और यही वजह है कि चुनाव प्रचार को लेकर शीर्ष नेतृत्व लगातार सक्रिय है। भाजपा का मानना है कि बांकीपुर केवल एक विधानसभा सीट नहीं, बल्कि पार्टी की राजनीतिक प्रतिष्ठा का केंद्र भी है।
इसी विरासत को कायम रखने के लिए संगठन बूथ स्तर तक सक्रिय नजर आ रहा है। राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन लगातार चुनावी रणनीति की समीक्षा कर रहे हैं। वे कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के साथ बैठकों के जरिए मतदान प्रतिशत बढ़ाने, बूथ प्रबंधन और घर-घर जनसंपर्क अभियान पर विशेष जोर दे रहे हैं।
पार्टी का मानना है कि संगठित कार्यकर्ता ही उसकी सबसे बड़ी ताकत हैं और इसी आधार पर भाजपा चुनावी बढ़त बनाए रखने का दावा कर रही है। शनिवार को भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा और राष्ट्रीय लोक मोर्चा के संयुक्त कार्यकर्ता सम्मेलन ने भी एनडीए की एकजुटता को मजबूत संदेश दिया। सम्मेलन में सभी दलों के प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेताओं ने साझा मंच से कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर चुनाव लड़ने का आह्वान किया।
भाजपा नेताओं का कहना है कि एनडीए के सभी घटक दलों का सामाजिक आधार एक-दूसरे का पूरक है और यही गठबंधन की सबसे बड़ी ताकत है। भाजपा इस चुनाव को केवल अपने पारंपरिक वोट बैंक के भरोसे नहीं लड़ रही, बल्कि विकास, सुशासन और गठबंधन की मजबूती को भी प्रमुख मुद्दा बना रही है। पार्टी की रणनीति विभिन्न सामाजिक वर्गों तक पहुंच बनाकर अपने समर्थन आधार को और व्यापक करने की है।
भाजपा की प्रदेश महामंत्री डॉ. प्रीति शेखर ने दावा किया है कि एनडीए की एकजुटता और संगठन की मजबूती के कारण बांकीपुर में पार्टी पहले से अधिक मतों के अंतर से जीत दर्ज करेगी। उनका कहना है कि कार्यकर्ताओं में जबरदस्त उत्साह है और जनता का भरोसा एनडीए सरकार के विकास कार्यों पर कायम है।
इस उपचुनाव में भाजपा ने जहां नीरज कुमार सिन्हा को प्रत्याशी बनाया है। वही जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर चुनावी मैदान में हैं, जबकि राजद की रेखा गुप्ता मुकाबले को त्रिकोणात्मक बना रही हैं। 30 जुलाई को होने वाले मतदान में यह स्पष्ट होगा कि क्या भाजपा अपनी परंपरागत सीट पर एक बार फिर विजय पताका फहराने में सफल होती है।
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