29.2 C
Mumbai
Thursday, November 5, 2026
होमदेश दुनियाहिजाब फैसले पर मौलाना की मांग, हाई कोर्ट फिर करे विचार!

हिजाब फैसले पर मौलाना की मांग, हाई कोर्ट फिर करे विचार!

इस्लाम में हिजाब जरूरी है, और भारत में हर धर्म और आस्था के लोग रहते हैं। सवाल यह है कि अगर कोई लड़की स्कार्फ पहनकर स्कूल जाना चाहती है| 

Google News Follow
इलाहाबाद हाई कोर्ट की ओर से दिए गए हिजाब फैसले पर मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली, शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास और मौलाना साजिद रशीदी की प्रतिक्रिया सामने आई है। आईएएनएस से बातचीत करते हुए हिजाब को लेकर ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के जनरल सेक्रेटरी मौलाना यासूब अब्बास ने कहा, “माननीय हाई कोर्ट का जो फैसला आया है, वह बहुत अफसोस की बात है।
इस्लाम में हिजाब जरूरी है, और भारत में हर धर्म और आस्था के लोग रहते हैं। सवाल यह है कि अगर कोई लड़की स्कार्फ पहनकर स्कूल जाना चाहती है, तो उसे ऐसा करने से पूरी तरह रोकना मेरी नजर में बिल्कुल गलत है, और कोर्ट को इस पर एक बार फिर से विचार करना चाहिए।”

यासूब अब्बास ने आगे कहा, “मैं कोर्ट पर तो कोई टिप्पणी नहीं कर सकता, लेकिन संविधान भी है। यहां हर धर्म और हर आस्था को समान अधिकार दिए गए हैं।

अगर कोई लड़की स्कार्फ पहनकर कॉलेज, स्कूल या कहीं भी, किसी फंक्शन या पार्टी में जाना चाहती है, तो कोर्ट द्वारा पाबंदी लगाना और कोर्ट के अधिकार से उसे अपना पर्दा हटाने के लिए मजबूर करना बिल्कुल गलत है। ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से मैं इसे पूरी तरह से खारिज करता हूं।”

मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने कहा, “हमारा मानना ​​है कि हिजाब को लेकर कोर्ट के फैसले की समीक्षा और उस पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। इसलिए, हमारा मानना ​​है कि जो लड़कियां स्कार्फ या हिजाब पहनकर स्कूल जाना चाहती हैं, उन्हें रोका नहीं जाना चाहिए।

जहां तक स्कूल यूनिफॉर्म की बात है, तो अगर कोई उस स्कूल में पढ़ना चाहता है, तो उसे यूनिफॉर्म पहननी ही होगी। लेकिन हिजाब या स्कार्फ की अनुमति देनी चाहिए।”

शिया धर्मगुरु मौलाना सैफ अब्बास ने आईएएनएस से कहा, “ड्रेस कोड से हमारा इनकार नहीं है; हर बच्चे को ड्रेस पहनकर ही स्कूल जाना चाहिए। अगर बच्ची हिजाब के लिए अनुमति मांग रही है, तो उसको अनुमति मिलनी चाहिए।

हाई कोर्ट की ओर से हिजाब को लेकर जो टिप्पणी की गई है कि इस्लाम में हिजाब जरूरी नहीं है, इसको हम स्वीकार नहीं करेंगे। हिजाब इस्लाम का जरूरी हिस्सा है। मेरा मानना है कि वकील की ओर से सही तरीके से पक्ष नहीं रखा गया। छात्रा को आगे कदम बढ़ाना चाहिए और सुप्रीम कोर्ट जाना चाहिए।

मौलाना साजिद रशीदी ने कहा, “हिजाब अपनी च्वाइस है; हाई कोर्ट की ओर से भी कहा गया है कि यह इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं है। हम मान लेते हैं कि यह इस्लामी हिस्सा नहीं है, लेकिन देश में धार्मिक आजादी और निजी स्वतंत्रता भी है। हिजाब की आजादी को लेकर क्यों सवाल खड़े होते हैं और कोर्ट की ओर से टिप्पणी की जाती है?

यह भी पढ़ें-
National Stock Exchange

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Star Housing Finance Limited
[td_block_social_counter open_in_new_window="y" style="style6 td-social-boxed" block_template_id="td_block_template_9" border_color="#fbd54a" f_header_font_size="26" f_header_font_weight="700" tdc_css="eyJhbGwiOnsibWFyZ2luLXRvcCI6IjAiLCJtYXJnaW4tYm90dG9tIjoiMzAiLCJwYWRkaW5nLXRvcCI6IjAiLCJkaXNwbGF5IjoiIn19" custom_title="हमें फॉलो करें" facebook="NewsDankaHindi" twitter="NewsDanka" youtube="channel/UCqtL0xCsgAmB3XXrh9nln2Q" manual_count_twitter="526" f_header_font_family="668"]

अन्य लेटेस्ट खबरें