आयकर विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में बताया कि 7 करोड़ से अधिक आयकर रिटर्न पहले ही दाखिल किए जा चुके हैं। विभाग ने कहा, “आकलन वर्ष 2026-27 के लिए 7 करोड़ से अधिक आईटीआर दाखिल किए जा चुके हैं।
विभाग ने करदाताओं को सलाह दी है कि वे रिटर्न दाखिल करते समय सही फॉर्म का चयन करें और अपनी आय की जानकारी पूरी सटीकता के साथ दर्ज करें। साथ ही, वार्षिक सूचना विवरण (एआईएस) में उपलब्ध जानकारी के साथ वित्तीय आंकड़ों का मिलान भी कर लें ताकि बाद में किसी प्रकार की त्रुटि या नोटिस की स्थिति न बने।
आमतौर पर आईटीआर-3 उन व्यक्तियों और हिंदू अविभाजित परिवारों (एचयूएफ) के लिए होता है, जिनकी आय व्यवसाय या पेशे से होती है और जो आईटीआर-1, आईटीआर-2 या आईटीआर-4 दाखिल करने के पात्र नहीं होते।
आयकर विभाग ने चेतावनी दी है कि समय सीमा चूकने पर करदाताओं को कई प्रकार की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसमें विलंब शुल्क, बकाया कर पर ब्याज, रिफंड मिलने में देरी और कुछ कर लाभों का नुकसान शामिल है।
हालांकि यदि कोई करदाता आज की समयसीमा तक रिटर्न दाखिल नहीं कर पाता है, तो वह 31 दिसंबर 2026 तक विलंबित रिटर्न दाखिल कर सकता है, बशर्ते उससे पहले निर्धारण प्रक्रिया पूरी न हो जाए। लेकिन विलंबित रिटर्न दाखिल करने की स्थिति में कई महत्वपूर्ण लाभ समाप्त हो सकते हैं, जिनमें व्यावसायिक या पूंजीगत हानियों को अगले वर्षों में आगे ले जाने की सुविधा भी शामिल है।
नियमों के अनुसार, यदि किसी करदाता की कुल आय 5 लाख रुपए से अधिक है, तो धारा 234एफ के तहत 5,000 रुपए तक का विलंब शुल्क लगाया जा सकता है। यदि कुल आय 5 लाख रुपए से कम है, तो यह शुल्क अधिकतम 1,000 रुपए होगा।
इसके अतिरिक्त, जिन करदाताओं पर कर बकाया है, उन्हें धारा 234ए के तहत बकाया राशि पर प्रति माह 1 प्रतिशत की दर से ब्याज भी देना पड़ सकता है।
विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि व्यवसाय या पेशेवर आय वाले वे करदाता जो डिफॉल्ट नई कर व्यवस्था से बाहर निकलकर पुरानी कर व्यवस्था का विकल्प चुनना चाहते हैं, उन्हें भी निर्धारित समयसीमा के भीतर अपना आयकर रिटर्न दाखिल करना आवश्यक है।




