अब हमको वादा नहीं चाहिए। जब तक स्टाइपेंड बढ़ाए जाने का रिटेन ऑर्डर नहीं मिल जाता है, तब तक हम लोगों का प्रदर्शन जारी रहेगा। शिक्षा मंत्री सकीना इटू की ओर से बयान दिया गया है कि हमारी फाइल अंडर प्रोसेस है, लेकिन उनका ये पहला बयान नहीं है।
डॉक्टर तनिशा महाजन ने आगे कहा कि अब हमको ये नहीं सुनना है कि हमारी फाइल अंडर प्रोसेस है। हम लोगों को स्टाइपेंड बढ़ाए जाने का रिटेन डॉक्यूमेंट चाहिए। सिर्फ यही एक कंडीशन है, जिसके बाद हम लोग वापस काम पर लौटेंगे। ऐसा न होना हमारे लिए चिंता का विषय है, क्योंकि हमारी ओर से 100 प्रतिशत दिया जा रहा है। ऐसे में हमारी भी सरकार से उम्मीद है कि वाजिब मांग का सरकार आदर करे। हम लोगों को स्टाइपेंड बढ़ाए जाने का पूरा भरोसा है।
डॉक्टर तानिश ने कहा कि जिस तरह से स्वास्थ्य मंत्री की ओर से बयान दिया गया है, इससे उन्होंने स्वीकार किया है कि हमारी मांग वाजिब है। लेकिन उन्होंने जो यह कहा कि हमारी ओर से स्वास्थ्य सेवाओं को डिस्टर्ब किया जा रहा है, उनका यह बयान बिल्कुल गलत है।
इमरजेंसी ड्यूटी में हम लोगों ने इंटर्नों को भेजा है। इमरजेंसी सेवाओं से हम लोगों की ओर से कोई कंप्रोमाइज नहीं किया जा रहा है। ओपीडी और नॉन इंमरजेंसी वाले इंटर्न यहां आए हैं। 2025 में भी स्टाइपेंड बढ़ाए जाने को लेकर बयान दिया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार से हमारी यही विनती है कि जल्द से जल्द प्रोसेस पूरा किया जाए। अगर ऐसा नहीं होता है कि हम लोगों को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ओपन लेटर लिखना पड़ेगा।
डॉक्टर सज्जाद मुस्तफा ने कहा कि हम लोग कल से प्रदर्शन कर रहे हैं और हमारी कोई बड़ी डिमांड नहीं है। हमारी मांग हर महीने 30 हजार रुपए स्टाइपेंड का है। जिस तरह से हमको डॉक्टर के बराबर जिम्मेदारी दी जा रही है, उस तरह से हमें स्टाइपेंड नहीं दिया जा रहा है।



