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Wednesday, October 28, 2026
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सीबीआई कोर्ट ने कुशल डायमंड्स डायरेक्टरों को सुनाई पांच साल सजा!

जांच में सामने आया कि एनएसआईसी ने बिल डिस्काउंटिंग फैसिलिटी और रॉ मटेरियल असिस्टेंस स्कीम के तहत कुशल डायमंड्स लिमिटेड को 2,34,85,081 रुपए की राशि दी थी।

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26 साल पुराने धोखाधड़ी के मामले में अहमदाबाद के सीबीआई कोर्ट ने 8 सितंबर को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने प्राइवेट कंपनी मेसर्स कुशल डायमंड्स लिमिटेड और उसके दो डायरेक्टरों को आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के मामले में दोषी करार दिया।

कोर्ट ने कंपनी पर 30 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। वहीं, कंपनी के चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर बकुल जवेरी और डायरेक्टर मजह एस. कपाड़िया को 5-5 साल के कठोर कारावास और 30-30 लाख रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है।

सीबीआई ने इस मामले में 15 मार्च 2000 को केस दर्ज किया था। आरोप नेशनल स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन (एनएसआईसी), अहमदाबाद के तीन अधिकारियों (तत्कालीन जॉइंट डायरेक्टर वीके सावनी, जॉइंट मैनेजर (फाइनेंस) रोहित ढींगरा और तत्कालीन रीजनल जनरल मैनेजर राम अवतार अग्रवाल) पर था। आरोप था कि इन अधिकारियों ने मुंबई की कंपनी मेसर्स कुशल डायमंड्स लिमिटेड के डायरेक्टरों के साथ आपराधिक साजिश रची।

जांच में सामने आया कि एनएसआईसी ने बिल डिस्काउंटिंग फैसिलिटी और रॉ मटेरियल असिस्टेंस स्कीम के तहत कुशल डायमंड्स लिमिटेड को 2,34,85,081 रुपए की राशि दी थी। इसमें से 1,34,88,717 रुपए पुराने बकाए में एडजस्ट, चेक से मिले भुगतान, विदेशी खरीदार से मिले भुगतान और अर्नेस्ट मनी डिपॉजिट के रूप में एडजस्ट हो गए। 31 मार्च 1996 तक कंपनी पर अंतिम बकाया राशि 99,96,364 रुपए थी, जो एनएसआईसी लिमिटेड को गलत तरीके से हुआ नुकसान था।

जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने 8 जनवरी 2002 को 8 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इनमें प्राइवेट कंपनी कुशल डायमंड्स लिमिटेड, उसके तीन डायरेक्टर बकुल जवेरी, मजह एस. कपाड़िया, सुभाष छनाना और एनएसआईसी के चार अधिकारी वीरेन्द्र कुमार सावनी, रोहित ढींगरा, राम अवतार अग्रवाल और राजेश अरोड़ा शामिल थे।

ट्रायल के बाद कोर्ट ने कंपनी और उसके दो डायरेक्टरों को दोषी ठहराया। वहीं एनएसआईसी के चारों सरकारी अधिकारियों (वीरेन्द्र कुमार सावनी, रोहित ढींगरा, राम अवतार अग्रवाल और राजेश अरोड़ा) को आरोपों से बरी कर दिया गया। एक अन्य आरोपी बाहरी व्यक्ति सुभाष छनाना का ट्रायल के दौरान निधन हो गया था, इसलिए उनके खिलाफ मामला कोर्ट ने समाप्त कर दिया।

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