पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (POJK) में कम्युनिकेशन सर्विस बंद करके वहां हो रहे कत्लेआम को दबाने की कोशिश कर रहे पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। हाई कोर्ट ने पाकिस्तान सरकार को 10 दिन के अंदर इंटरनेट सर्विस बहाल करने का निर्देश दिया है और इस बारे में सरकार से जवाब भी मांगा है। इससे पाकिस्तानी सेना और लोकल एडमिनिस्ट्रेशन की चिंता बढ़ गई है। कम्युनिकेशन सर्विस बहाल होने के बाद पूरी दुनिया POJK के हालात देख सकेगी और वहां की असलियत को करीब से समझ सकेगी।
5 जून को जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के प्रस्तावित मार्च और धरने के बैकग्राउंड में पाकिस्तान ने POJK में लोगों की आवाज उठाने वाली JAAC पर बैन लगा दिया था। उसने एक्टिविस्ट को आतंकवादी घोषित करके उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी थी। उसके बाद 5 जून की रात करीब 11.30 बजे पूरे इलाके में मोबाइल और इंटरनेट सर्विस बंद कर दी गईं। आंदोलन को कुचलने के लिए रेंजर्स और फ्रंटियर कॉर्प्स को भी तैनात किया गया था। इसके लिए सरकार ने कानून-व्यवस्था की स्थिति और संभावित हिंसा को वजह बताया था। इस केस की सुनवाई के दौरान 10 सितंबर को कोर्ट ने सभी इलाकों में कम्युनिकेशन सर्विस बहाल करने का निर्देश दिया था।
कर्फ्यू के साथ-साथ पाकिस्तानी सरकार ने मीडिया पर भी रोक लगा दी है। सरकार ने इंटरनेशनल मीडिया को इलाके में आने से रोक दिया है। ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइज़ेशन को भी प्रभावित ज़िलों में जाने की इजाज़त नहीं दी गई है। पाकिस्तानी सरकार ने विरोध प्रदर्शनों को कवर करने वाले पत्रकारों और ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट पर भी कार्रवाई की है। ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट अहमद फरहाद को जून में ही हिरासत में लिया गया था।
POJK के एक्सपर्ट ज़ोरावर सिंह जंबाल ने कहा कि बड़ा सवाल यह है कि अगर जून में सुरक्षा कारणों से इंटरनेट सर्विस बंद कर दी गई थीं, तो अगस्त के आखिर तक मीरपुर, भीमबर, नीलम और हवेली जैसे इलाकों में सर्विस बहाल होने के बाद भी रावलकोट और सुधानोटी को अलग-थलग क्यों रखा गया?
सिक्योरिटी एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तानी सेना ने रावलकोट में बड़े पैमाने पर कत्लेआम किया है। आरोप है कि वहां की महिलाओं को किडनैप किया गया है। करीब 500 महिलाएं अभी भी लापता हैं। आरोप है कि पाकिस्तान ने इन कथित ज़ुल्मों को छिपाने के लिए रावलकोट में बड़े पैमाने पर पाबंदियां लगाईं।
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