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Monday, October 26, 2026
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सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने आसमान में किया हैरतअंगेज हवाई करतबों का प्रदर्शन!

खास बात यह रही कि सूर्यकिरण टीम के तीन सदस्य मेरठ से हैं। इनमें दो पायलट भी शामिल हैं, जिन्होंने हवाई करतबों में हिस्सा लिया।

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भारतीय वायुसेना की सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने पहली बार मेरठ के आसमान में अपने हैरतअंगेज हवाई करतबों का प्रदर्शन किया। वायुसेना के मुताबिक, 19 और 20 सितंबर को आयोजित इस दो दिवसीय एयर शो को देखने के लिए एक लाख से अधिक लोग पहुंचे। इनमें बड़ी संख्या में विद्यार्थी, एनसीसी कैडेट व राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवक शामिल रहे। खास बात यह रही कि सूर्यकिरण टीम के तीन सदस्य मेरठ से हैं। इनमें दो पायलट भी शामिल हैं, जिन्होंने हवाई करतबों में हिस्सा लिया।

रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने 20 सितंबर को भी एयर शो देखा। उन्होंने इसे अनुशासन, सटीकता, टीमवर्क और पेशेवर क्षमता का शानदार मेल बताया। उन्होंने कहा कि यह भारतीय वायुसेना की गौरवशाली क्षमताओं को दर्शाता है।

संजय सेठ ने सूर्यकिरण टीम के साहस और समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि अपने 30 साल के सफर में टीम भारत और विदेशों में 800 से अधिक एयर शो कर चुकी है। वर्ष 2026 के प्रशिक्षण सत्र के सफल समापन के बाद सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम ने मेरठ के लोगों के सामने अपनी नई उड़ान संरचना का प्रदर्शन किया।

टीम ने नौ लाल और सफेद रंग के हॉक एमके-132 विमानों के साथ आसमान में कई रोमांचक करतब दिखाए। इन विमानों का भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा निर्माण किया जाता है। प्रदर्शन के दौरान लूप, बैरल रोल, उल्टी उड़ान और प्रसिद्ध डीएनए करतब ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

इन सभी करतबों में पायलटों की सटीक उड़ान, कौशल और आपसी तालमेल साफ दिखाई दिया। सूर्यकिरण टीम की उड़ान का सबसे चुनौतीपूर्ण पहलू यह है कि उसके विमान बेहद कम दूरी पर एक साथ उड़ते हैं।

कई करतबों के दौरान विमानों के बीच की दूरी पांच मीटर से भी कम रहती है। ऐसे में हर उड़ान पायलटों के असाधारण कौशल, अनुशासन और एक-दूसरे पर पूर्ण भरोसे का प्रदर्शन करती है। सूर्यकिरण के हॉक एमके-132 विमानों में स्वदेशी स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव भी किया गया है।

विमानों में ऐसे धुआं छोड़ने वाले उपकरण लगाए गए हैं,  जिनसे अलग-अलग रंगों का धुआं निकलता है।  यह स्वदेशी बदलाव भारतीय वायुसेना के नासिक स्थित बेस रिपेयर डिपो में विकसित किया गया है।

इस तकनीक की मदद से सूर्यकिरण के विमान आसमान में केसरिया, सफेद और हरे रंग की धारियां बनाते हैं। इससे हवाई प्रदर्शन के दौरान आसमान तिरंगे के रंगों से सजा नजर आता है। सूर्यकिरण एरोबैटिक टीम की स्थापना 1996 में हुई थी। यह एशिया की एकमात्र नौ-विमान वाली एरोबैटिक टीम है और दुनिया की चुनिंदा ऐसी टीमों में शामिल है।

टीम अब तक भारत में 800 से अधिक हवाई प्रदर्शन कर चुकी है। सूर्यकिरण ने चीन, श्रीलंका, म्यांमार, थाईलैंड, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और दुबई में आयोजित अंतरराष्ट्रीय एयर शो में भी भारतीय वायुसेना की पेशेवर क्षमता का प्रदर्शन किया है।

तीन दशक के सफर में सूर्यकिरण केवल हवाई करतब दिखाने वाली टीम नहीं रह गई है। इसे भारतीय वायुसेना का ‘दूत’ भी माना जाता है। जहां भी यह टीम पहुंचती है, वहां भारतीय वायुसेना की उत्कृष्टता, अनुशासन, सटीकता और समर्पण की झलक देखने को मिलती है।

साथ ही इसके प्रदर्शन का उद्देश्य युवाओं को रक्षा सेवाओं में करियर बनाने के लिए प्रेरित करना और उन्हें भारतीय वायुसेना की पेशेवर कार्यशैली को करीब से देखने का अवसर देना भी है।

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