इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास में भारत के अलावा अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, जर्मनी, श्रीलंका और संयुक्त अरब अमीरात अपने विमान और वायुसेना संसाधन लेकर भारत पहुंचेंगे।
फ्रांस की ओर से सात राफेल, तीन ए400एम और दो एमआरटीटी विमान अभ्यास में हिस्सा लेंगे। ऑस्ट्रेलिया एक सी-130 विमान के साथ और बांग्लादेश एक सी-130 विमान के साथ अभ्यास में शामिल होगा। जर्मनी दो ए400एम विमान भेजेगा। श्रीलंका एक किंग एयर 350 विमान के साथ भाग लेगा। संयुक्त अरब अमीरात की ओर से छह एफ-16 और एक ग्लोबल 6000 विमान अभ्यास में शामिल होंगे।
भारतीय वायुसेना भी अपने प्रमुख लड़ाकू विमानों के साथ अभ्यास में हिस्सा लेगी। इसमें राफेल, सुखोई-30 एमकेआई, एलसीए तेजस, जगुआर, मिराज और मिग-29 शामिल हैं। इस तरह भारतीय और विदेशी वायु सेनाओं के लड़ाकू विमानों को एक साथ जटिल हवाई अभियानों का अभ्यास करने का अवसर मिलेगा।
‘तरंग शक्ति-2026’ का उद्देश्य विभिन्न देशों की वायु सेनाओं के बीच परिचालन सहयोग, आपसी समन्वय और संयुक्त सामरिक प्रक्रियाओं को मजबूत करना है। अभ्यास के दौरान भाग लेने वाली वायु सेनाएं एक-दूसरे की परिचालन प्रक्रियाओं और अनुभवों को समझेंगी।
इससे विभिन्न वायु सेनाओं के बीच पेशेवर आदान-प्रदान और परिचालन अनुभव साझा करने का अवसर मिलेगा। 10 अक्टूबर को विशिष्ट आगंतुक दिवस और मीडिया दिवस आयोजित किया जाएगा। इस दौरान अभ्यास में शामिल विभिन्न देशों के वायुसेना दल और उनके विमानों की गतिविधियों को करीब से देखने का अवसर मिलेगा।
28 सितंबर से 11 अक्टूबर तक चलने वाला ‘तरंग शक्ति-2026’ भारतीय वायुसेना और मित्र देशों की वायु सेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और परिचालन अनुभव साझा करने का महत्वपूर्ण मंच होगा। इसमें अत्याधुनिक लड़ाकू विमानों की भागीदारी के कारण हवाई युद्धाभ्यास और संयुक्त सामरिक प्रशिक्षण का दायरा भी काफी व्यापक रहेगा।




