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Wednesday, January 14, 2026
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मल्लिकार्जुन खड़गे ने मारी बाजी, बने कांग्रेस के नए अध्यक्ष

मल्लिकार्जुन खरगे को सात हजार से ज्यादा वोट मिले

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काँग्रेस पार्टी में अध्यक्ष पद को लेकर काफी उथल पुथल मचा हुआ था। हालांकि विवादों के बाद आखिरकार अध्यक्ष पद के लिए मल्लिकार्जुन खरगे और शशि थरूर के नाम को चुना गया था। पहले गांधी परिवार राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को अध्यक्ष पद के लिए आगे कर रही थी, लेकिन राजस्थान में सियासी ड्रामे के बाद खरगे का नाम लाना पड़ा। वहीं नए अध्यक्ष की रेस में शुरुआत से ही मल्लिकार्जुन खरगे को आगे बताया जा रहा था। इसका बड़ा कारण था कि गांधी परिवार से लेकर कांग्रेस के दिग्गज नेताओं का समर्थन खरगे को मिला था। आखिरकार मंगलवार को मल्लिकार्जुन खरगे कांग्रेस के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं। 9,800 से ज्यादा कांग्रेस नेताओं ने अपने- अपने वोट दिया थे। इनमें से 7,897 वोट खरगे के पक्ष में पड़े। वहीं, उनके विरोधी शशि थरूर को एक हजार से ज्यादा वोटों से ही संतोष करना पड़ा। हालांकि थरूर ने अपनी हार स्वीकार कर ली है। उन्होंने ट्वीट करके खरगे को जीत की बधाई दी।

हालांकि कांग्रेस अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। एक समय जिस पार्टी की पूरे देश में सरकार हुआ करती थी, आज वो दो राज्यों तक सिमटकर रह गई है। जबकि उन राज्यों में भी काँग्रेस स्थिति ज्यादा बेहतर नहीं है। लेकिन अब देखना होगा कि काँग्रेस पार्टी के नए अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी में किस तरह के बदलाव देखने मिलेंगे। वहीं पार्टी में कई नेता है जो बदलाव चाहते हैं। कहा जाता है कि खरगे वही करते थे, जो उन्हें कहा जाता था। अभी अध्यक्ष पद के लिए भी उनका नामांकन बहुत जल्दबाजी में हुआ। अध्यक्ष पद को लेकर खरगे का एजेंडा भी साफ नहीं है। ऐसी स्थिति में अगर वह अध्यक्ष बनते हैं तो भी कोई खास बदलाव हो, इसकी संभावना बहुत कम है।

बात यदि ‘2004 से 2014’ की करें तो इस समय कांग्रेस सत्ता में थी। उस समय भले ही प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे, लेकिन हर बड़ा फैसला गांधी परिवार की मंजूरी से ही होता था। एक बार तो मनमोहन सरकार की तरफ से पास किए गए अध्यादेश को राहुल गांधी ने भरी संसद में फाड़ दिया था। मतलब साफ है, भले ही अध्यक्ष पद पर मल्लिकार्जुन खरगे बैठैं, लेकिन सारे बड़े फैसले गांधी परिवार की मंजूरी से ही होंगे। अगर ऐसा होता है, तो आने वाले समय में कुछ खास बदलाव देखने को नहीं मिलेगा।

खरगे गांधी परिवार के भरोसेमंद माने जाते हैं। साल 2014 में खरगे को लोकसभा में पार्टी का नेता बनाया गया। लोकसभा चुनाव 2019 में हार के बाद कांग्रेस ने उन्हें 2020 में राज्यसभा भेज दिया। पिछले साल गुलाम नबी आजाद का कार्यकाल खत्म हुआ तो खरगे को राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष बना दिया गया और वर्तमान समय में पार्टी के अध्यक्ष। अब सवाल यह है कि खरगे के अध्यक्ष बनने से कांग्रेस को कितना फायदा मिलेगा? क्या पार्टी में बदलाव हो पाएगा? क्या काँग्रेस की डूबती नैया को सहारा मिलेगा? हालांकि यह देखना वाकई में दिलचस्प होगा कि खरगे के अध्यक्ष बनने का के बाद काँग्रेस के स्तर उठेगा या गिरेगा?

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