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Wednesday, January 14, 2026
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सोरोस द्वारा वित्त पोषित संस्था पर मोदी सरकार की कारवाई, हटाया “गैर-लाभकारी” का टैग हटाया

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जॉर्ज सोरोस की ओपन सोसायटी फाउंडेशन द्वारा वित्तपोषित संस्था ‘रिपोर्टर्स कलेक्टिव’ ने एक्स अकाउंट से जानकारी दी कि मोदी सरकार ने उसका ‘गैर-लाभकारी दर्जा’ छीन लिया है। बता दें की अमेरिकी डीप स्टेट द्वारा वित्तपोषित विवादास्पद समूह द्वारा भारत में गरीबी में नाटकीय कमी दिखाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा ‘आंकड़ों में हेराफेरी’ करने के आरोप लगाकर फर्जी खबर प्रकाशित करने के कारण किया गया है।

रिपोर्ट्र्स कलेक्टिव लो तथ्यरहित रिपोर्ट:

बता दें की, रिपोर्टर्स कलेक्टिव ने 18 दिसंबर 2024 को एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी की भाजपा सरकार ने भारत में गरीबी में नाटकीय कमी दिखाने के लिए “होममेड पॉवर्टी इंडेक्स” में हेराफेरी की थी। इसमें दावा किया गया कि 10 वर्षों में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकालने की सरकार की रिपोर्ट झूठी है, क्योंकि भारत सरकार ने वैश्विक सूचकांक में दो महत्वपूर्ण पैरामीटर जोड़ दिए हैं।

रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि चूंकि वैश्विक रैंकिंग प्रकाशित करने वाली अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को धमकाया नहीं जा सकता था, इसलिए मोदी सरकार ने अपना स्वयं का सूचकांक तैयार किया और अच्छे परिणाम दिखाने के लिए परिणामों में हेराफेरी की। बता दें की रिपोर्टर्स कलेक्टिव की ओर से ‘आंकड़ों में हेराफेरी’ के दावे पर कोई सबूत नहीं दिया था, साथ ही केवल अस्पष्ट दावे और आरोप लगाए गए थे, जिनका अप्रमाण थे।

वैश्विक बहुआयामी गरीबी सूचकांक ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल (ओपीएचआई) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा विकसित किया गया था। रिपोर्टर्स कलेक्टिव ने अपनी रिपोर्ट में स्वयं उल्लेखित किया कि नीति आयोग ने भारत का अपना बहुआयामी गरीबी सूचकांक बनाया और सूचकांक विकसित करने के लिए ओपीएचआई और यूएनडीपी के साथ साझेदारी की। वैश्विक सूचकांक के निर्माता भी भारतीय सूचकांक के लिए अतिरिक्त पैरामीटर जोड़ने से सहमत हैं। लेकीन फिर भी रिपोर्टर्स कलेक्टिव ने आरोप लगाया की नए पैरामीटर जोड़ने से डेटा में ‘हेराफेरी’ हुई।

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सॉरोस और अमेरीकी डीप स्टेट से वित्तपोषित संस्था:रिपोर्टर्स कलेक्टिव के पीछे कौन से संगठन हैं, इस पर नज़र डालना ज़रूरी है। इसके मूल संगठन के दानदाताओं की सूची पर नज़र डालने से पता चलता है कि इसे भारत विरोधी अभियान के पीछे मौजूद संदिग्धों का समर्थन हासिल है।

रिपोर्टर्स कलेक्टिव का संचालन नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया द्वारा किया जाता रहा है, जिसे FCRA-पंजीकृत NGO संस्था कहा गया था। इस संस्था के दानदाताओं की सूची के अवलोकन से पता चलता है कि यह नेशनल फाउंडेशन फॉर इंडिया को फोर्ड फाउंडेशन, जॉर्ज सोरोस के ओपन सोसाइटी फाउंडेशन, ओमिडयार नेटवर्क और रॉकफेलर फाउंडेशन आदि से वित्तपोषित है।

सूची में मौजूद सभी संगठन अमेरिकी डीप स्टेट नेटवर्क का हिस्सा हैं, इन्होंने कई भारत विरोधी अभियानों और पहलों को वित्त पोषित किया है। रिपोर्टर्स कलेक्टिव अमेरिकी डीप स्टेट के भारत विरोधी मोर्चे का एक हिस्सा है।

मोदी सरकार का कड़ा एक्शन:
रिपोर्टर्स कलेक्टिव का दावा है कि यह समूह जुलाई 2021 से एक ‘गैर-लाभकारी ट्रस्ट’ के रूप में मौजूद है। उन्होंने आरोप लगाया गया है की, “लेकिन अब कर अधिकारियों ने हमारा गैर-लाभकारी दर्जा रद्द कर दिया है और दावा किया है कि पत्रकारिता किसी सार्वजनिक उद्देश्य की पूर्ति नहीं करती है और इसलिए इसे भारत में गैर-लाभकारी गतिविधि के रूप में नहीं चलाया जा सकता।”

रिपोर्टर्स कलेक्टिव कहना है कि अधिकारियों द्वारा ‘गैर-लाभकारी दर्जा’ रद्द किए जाने से उसके ‘पत्रकारिता कार्य’ को जारी रखने की क्षमता में बाधा उत्पन्न होगी। सोरोस द्वारा वित्तपोषित पत्रकारों के समूह ने आरोप लगाया, “हमारे गैर-लाभकारी दर्जे को रद्द करने वाले आदेश से हमारे काम करने की क्षमता पर गंभीर असर पड़ेगा और देश में स्वतंत्र सार्वजनिक पत्रकारिता के लिए स्थितियां और खराब होंगी।”

वहीं रिपोर्टर्स कलेक्टिव समूह ने घोषणा की है की वे मोदी सरकार की कारवाई को रद्द करने के लिए कानूनी उपाय का सहारा लेंगे।

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