संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराते मंदी के खतरे को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि संभावित ट्रेड वॉर के नतीजे दुनिया के सबसे गरीब तबके को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। गुटेरेस ने यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा “पारस्परिक टैरिफ” लगाने की घोषणा से कुछ घंटे पहले की।
UN चीफ एंटोनियो गुटेरेस कहा, “मुझे पूरी उम्मीद है कि हमारे यहां मंदी नहीं आएगी, क्योंकि मंदी के गंभीर परिणाम होंगे, खासकर दुनिया के सबसे गरीब लोगों के लिए।” उन्होंने ट्रेड वॉर की व्यापक हानियों की चेतावनी दी और कहा, “ट्रेड वॉर बहुत नुकसानदायक होते हैं। इसमें कोई भी नहीं जीतता, सभी हारते हैं।”
गुटेरेस ने आगे कहा, “मैं खासकर सबसे कमजोर विकासशील देशों को लेकर चिंतित हूं, क्योंकि इसका असर उन पर ज्यादा बुरा होगा।”
दरअसल, राष्ट्रपति ट्रंप ने चीन से आयात होने वाली वस्तुओं पर 104 प्रतिशत टैरिफ लगाने का फैसला लिया है, जो बुधवार आधी रात से प्रभावी हो जाएगा। जवाबी कार्रवाई में चीन ने भी 34 प्रतिशत टैरिफ लागू करने का ऐलान किया है, जिससे वैश्विक व्यापारिक तनाव और बढ़ गया है।
इस बीच, संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास सम्मेलन (UNCTAD) की महासचिव रेबेका ग्रिनस्पैन ने व्यापार प्रणाली में सुधार की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा, “वैश्विक व्यापार नियमों को आज की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए बदला जाना चाहिए, लेकिन इन बदलावों में यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वे सबसे कमजोर लोगों की रक्षा करें और विकास को बढ़ावा दें।” उन्होंने यह भी जोड़ा, “यह एकजुट होने का समय है, न कि तनाव बढ़ाने का।”
विश्व व्यापार संगठन (WTO) की उप महानिदेशक एंजेला एलार्ड ने चेतावनी दी है कि हाल में अमेरिका और अन्य देशों द्वारा उठाए गए टैरिफ उपायों के कारण इस वर्ष वैश्विक वस्तु व्यापार में लगभग 1 प्रतिशत की गिरावट हो सकती है। यह संगठन द्वारा पहले अनुमानित 3 प्रतिशत की वृद्धि से करीब 4 प्रतिशत का अंतर दर्शाता है।
एलार्ड ने कहा, “डब्ल्यूटीओ प्रणाली को कमजोर करने के प्रयासों के बावजूद, अभी भी वैश्विक व्यापार का 74 प्रतिशत डब्ल्यूटीओ के सर्वाधिक-तरजीही-राष्ट्र (एमएफएन) शर्तों के तहत होता है।”
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि डब्ल्यूटीओ प्रणाली आज भी प्रासंगिक है और बहुपक्षीय व्यापार ढांचा प्रभावी रूप से कार्य कर रहा है। इसी क्रम में चीन और कनाडा ने अमेरिका के साथ व्यापार विवादों को WTO के ढांचे में उठाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उन्होंने परामर्श की मांग की है, जिससे 60 दिनों के भीतर आपसी बातचीत से समाधान निकल सके। अगर ऐसा नहीं हुआ तो पैनल द्वारा विवाद का निर्णय लिया जा सकता है।
ट्रेड वॉर की आहट ने जहां अंतरराष्ट्रीय मंच पर चिंता की लहर दौड़ा दी है, वहीं संयुक्त राष्ट्र नेतृत्व ने इसके मानवीय असर को सबसे बड़ी चुनौती बताया है।
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