30.9 C
Mumbai
Saturday, October 10, 2026
होमबॉलीवुड“मुझे नहीं पता कि मैं कल यहां रहूंगा या नहीं”

“मुझे नहीं पता कि मैं कल यहां रहूंगा या नहीं”

चार दिन पहले बयान की हो रही चर्चा

Google News Follow

Related

दिग्गज एक्टर नाना पाटेकर के अचानक निधन के बाद, उनकी आखिरी पब्लिक स्पीच की खास तरीके से चर्चा हो रही है। अपने निधन से ठीक चार दिन पहले, 4 अक्टूबर को, नाना पाटेकर गोवा के डोना पाउला में हुए सम्राट क्लब इंटरनेशनल के फाउंडेशन सेरेमनी में शामिल हुए थे। इस समय, ज़िंदगी, इंसान का मकसद और नश्वरता पर उनकी स्पीच अब फैंस के लिए इमोशनल हो रही है।

नाना पाटेकर ने अपनी स्पीच में ज़िंदगी की अनिश्चितता का ज़िक्र किया था। उन्होंने कहा था, “हम सभी को कभी न कभी जाना ही है। मुझे नहीं पता कि मैं कल यहां रहूंगा या नहीं।” यह पल एक दिन हर किसी की ज़िंदगी में आएगा, लेकिन उस दिन के आने से पहले, हमें यह सोचना चाहिए कि हम जो करना चाहते हैं, उसे करने की काबिलियत और तैयारी हममें है या नहीं।

नाना पाटेकर ने सिर्फ़ परिवार और पर्सनल ज़िंदगी तक ही सीमित न रहकर, समाज के लिए कुछ करने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया। “अगर मेरी दुनिया सिर्फ़ मेरे बच्चों, पत्नी और घर तक ही सीमित है, तो मेरी ज़िंदगी का क्या मकसद है? मुझे इस दुनिया को कुछ वापस देना चाहिए,” उन्होंने सोचा।

इस प्रोग्राम में नाना पाटेकर ने अपने गुज़र चुके दोस्त और गोवा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर को भी याद किया। पर्रिकर के काम का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने ज़िंदगी के मकसद और समाज में योगदान देने की अहमियत पर कमेंट किया।

अपनी स्पीच में नाना पाटेकर ने पब्लिक लाइफ़ और सिविक एटिकेट में अंतर पर भी कमेंट किया। अगर किसी को कोई चीज़ पसंद नहीं है, तो उसे उसके ख़िलाफ़ बोलने का हक़ है। हालांकि, उन्होंने साफ़ किया कि अपनी राय ज़ाहिर करते समय कम से कम तहज़ीब और सही तरीके का पालन किया जाना चाहिए। नाना पाटेकर ने कहा था, “अगर मुझे कोई चीज़ पसंद नहीं है, तो मुझे उसके बारे में ज़रूर बोलना चाहिए। लेकिन बोलने का एक तरीका होता है। कम से कम पब्लिक में बोलते समय तहज़ीब तो होनी चाहिए।”

पांच दशकों का एक्टिंग सफ़र

नाना पाटेकर ने 1978 में फ़िल्म ‘गमन’ से अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी। अगले पांच दशकों में उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा में अलग-अलग तरह के रोल निभाकर अपना नाम बनाया। ‘परिंदा’, ‘प्रहार’, ‘क्रांति वीर’ और ‘अब तक छप्पन’ जैसी फिल्मों में उनके सीरियस और असरदार रोल खास तौर पर पॉपुलर हुए। वहीं, ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों में उन्होंने कॉमिक रोल भी उतने ही असरदार तरीके से निभाए। इसी वजह से उनके करियर में सीरियस एक्टिंग से लेकर कॉमिक रोल तक का एक बड़ा दायरा देखने को मिला।

इस बीच, 75 साल के नाना पाटेकर की 8 अक्टूबर की सुबह गोवा के डोना पाउला के मणिपाल हॉस्पिटल में मौत हो गई। उन्हें सीरियस हार्ट अटैक आया था। डॉक्टरों ने करीब 45 मिनट तक CPR देकर उन्हें बचाने की कोशिश की; लेकिन इलाज का कोई असर नहीं हुआ।

यह भी पढ़ें-

सऊदी एयरस्पेस से उड़ानें रोकें; हूथी की ग्लोबल एयरलाइंस को आखिरी चेतावनी

National Stock Exchange

लेखक से अधिक

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

Star Housing Finance Limited

हमें फॉलो करें

150,046फैंसलाइक करें
526फॉलोवरफॉलो करें
337,000सब्सक्राइबर्ससब्सक्राइब करें

अन्य लेटेस्ट खबरें