उद्योगपति अनिल अंबानी ने मुंबई उच्च न्यायालय में रिपब्लिक टीवी और उसके एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर किया है। साथ ही अनिल अंबानी ने अदालत से चैनल के कथित भ्रामक कवरेज पर रोक लगाने के लिए अंतरिम आदेश की मांग की है। मामले पर की सुनवाई 1 अप्रैल को जस्टिस मिलिंद जाधव की पीठ के समक्ष होने की संभावना है।
याचिका में अनिल अंबानी ने कहा कि हाल के दिनों में चैनल द्वारा प्रसारित कई रिपोर्ट्स और सोशल मीडिया पोस्ट्स ने उनकी छवि को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। उनके अनुसार, इन रिपोर्ट्स में उन्हें प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच से जोड़कर दिखाया गया, जो कुछ रिलायंस समूह की कंपनियों से संबंधित है।
याचिका में कहा गया है, “ये आपत्तिजनक प्रकाशन और बयान नियामकीय कार्यवाहियों की रिपोर्टिंग का दावा करते हैं… जो रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (RCOM), रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड और/या रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड जैसी कंपनियों से संबंधित हैं।” अंबानी का कहना है कि इस तरह की रिपोर्टिंग भ्रामक है और इससे यह गलत धारणा बनती है कि वह इन मामलों में सीधे तौर पर शामिल हैं।
अनिल अंबानी ने अपनी याचिका में स्पष्ट किया कि उन्होंने नवंबर 2019 में रिलायंस कम्युनिकेशंस के नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे दिया था और इसके बाद वह किसी भी संबंधित कंपनी के दैनिक संचालन या प्रबंधन में शामिल नहीं रहे। याचिका में कहा गया है, “ये कंपनियां स्वतंत्र इकाइयां थीं और आवेदक उनके दैनिक प्रबंधन और निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल नहीं थे।” उन्होंने आरोप लगाया कि इन तथ्यों की जानकारी होने के बावजूद चैनल और उसके एंकर ने उन्हें जांच से जोड़कर प्रस्तुत किया, जो दुर्भावनापूर्ण, झूठा और गैर-जिम्मेदाराना है।
अंबानी ने यह भी आरोप लगाया कि चैनल ने अपनी रिपोर्टिंग में सनसनीखेज और मानहानिकारक शब्दों का इस्तेमाल किया। उनके अनुसार, उन्हें वित्तीय घोटाले का मास्टरमाइंड, धोखेबाज, मनी लॉन्डरर, फ्रॉड जैसे शब्दों से संबोधित किया गया। याचिका में कहा गया है, “इन आरोपों ने दोषी होने की झूठी धारणा पैदा की है और आवेदक को सार्वजनिक घृणा, उपहास और अवमानना का सामना करना पड़ा है, जिससे उनकी प्रतिष्ठा और पेशेवर छवि को गंभीर और अपूरणीय क्षति पहुंची है।”
इस कानूनी कार्रवाई के जरिए अनिल अंबानी ने वित्तीय और प्रतिष्ठागत नुकसान की भरपाई के साथ-साथ अदालत से उचित राहत की मांग की है। याचिका में कहा गया है, “यह वाद आवेदक को हुए नुकसान और क्षति के निवारण के लिए दायर किया गया है… प्रतिवादियों ने अवैध, दुर्भावनापूर्ण, लापरवाह और/या लापरवाहीपूर्ण तरीके से कार्य किया है, जिससे गंभीर क्षति हुई है।”
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