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US द्वारा बैन किया गया चीनी टैंकर US की नाकाबंदी के बावजूद होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रा

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अमेरिका द्वारा बैन किया गया एक चीनी टैंकर मंगलवार (14 अप्रैल) को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रा, जबकि चोकपॉइंट पर U.S. की नाकाबंदी थी।। शिपिंग डेटा के अनुसार, रिच स्टारी नामक टैंकर मंगलवार को इस रणनीतिक मार्ग से सफलतापूर्वक गुजर गया।

यह टैंकर अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में है और इसका संचालन शंघाई ज़ुआनरुन शिपिंग कंपनी लिमिटेड द्वारा किया जाता है, जिस पर ईरान के साथ व्यापार करने के आरोप में कार्रवाई की गई थी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह टैंकर लगभग 2.5 लाख बैरल मेथनॉल लेकर जा रहा था, जिसे उसने हमरिया बंदरगाह से लोड किया था।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहला ऐसा जहाज है जो अमेरिकी नाकेबंदी शुरू होने के बाद खाड़ी क्षेत्र से बाहर निकलने में सफल रहा है। इससे यह संकेत मिलता है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर स्थिति जटिल बनी हुई है।

बता दें इससे पहले ही चीन ने अमेरिका की कार्रवाई पर चेतावनी दी है। चीन के रक्षा मंत्री डोंग जून ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर किसी भी प्रकार की नाकेबंदी स्वीकार्य नहीं है और अन्य देशों को चीन-ईरान संबंधों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा, “हमारे ईरान के साथ व्यापार और ऊर्जा समझौते हैं; अन्य देशों को हमारे आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।” उन्होंने यह भी जोर दिया कि यह समुद्री मार्ग चीन के लिए खुला रहना आवश्यक है।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। चीन अपनी तेल जरूरतों का लगभग 40 प्रतिशत और एलएनजी का करीब 30 प्रतिशत इसी मार्ग से प्राप्त करता है। ऐसे में इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार का तनाव सीधे वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका की यह नाकेबंदी केवल ईरान को दबाव में लाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन वैकल्पिक भुगतान प्रणालियों को भी निशाना बना सकती है, जिनमें चीनी युआन का उपयोग किया जा रहा है। इसे लंबे समय से प्रचलित पेट्रोडॉलर प्रणाली के लिए चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

बढ़ते तनाव के बीच चीन ने क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए युद्धविराम पर जोर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टकराव बढ़ता है, तो इसका असर न केवल खाड़ी क्षेत्र बल्कि वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला पर भी व्यापक रूप से पड़ सकता है।

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