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Saturday, April 18, 2026
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बंगाल कोयला घोटाला मामले में आई-पैक के सह-संस्थापक गिरफ्तार

ईडी की कार्रवाई

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राजनीतिक परामर्श कंपनी आई-पैक के सह-संस्थापक विनेश चंदेल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया है। यह मामला पश्चिम बंगाल के कोयला घोटाले से जुड़ा है। ED ने चंदेल को दिल्ली में धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत हिरासत में लिया।

ED ने 2 अप्रैल को दिल्ली में उनकी संपत्तियों के अलावा, आई-पैक के दूसरे सह-संस्थापक ऋषि राज सिंह की बेंगलुरु स्थित और आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व संपर्क प्रभारी विजय नायर की मुंबई स्थित संपत्तियों पर भी छापेमारी की थी।

ED ने दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। अब तक की जांच में आई-पैक द्वारा वित्तीय अनियमितताओं और मनी लॉन्ड्रिंग के कई तरीके सामने आए हैं। इनमें हिसाबी और बेहिसाबी फंड प्राप्त करना, बिना किसी व्यावसायिक दस्तावेजों के असुरक्षित ऋण लेना, फर्जी बिल और इनवॉइस बनाना, तीसरे पक्ष से धन लेना और अंतरराष्ट्रीय हवाला के जरिए नकद लेनदेन करना शामिल है। जांच में यह भी सामने आया है कि आई-पैक करोड़ों रुपये के आपराधिक धन के मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल थी। अब तक लगभग 50 करोड़ रुपये की राशि जब्त की जा चुकी है।

जांच के दौरान लेनदेन से जुड़े कई लोगों के बयान दर्ज किए गए हैं। तलाशी भी ली गई है और आपत्तिजनक सामग्री जब्त की गई है। इस मामले में विनेश चंदेल की भूमिका सामने आई है। संबंधित कानूनों के अनुसार, यदि किसी अपराध में कंपनी के निदेशकों की सहमति, मिलीभगत या लापरवाही शामिल होती है, तो उन्हें जिम्मेदार ठहराया जाता है।

गिरफ्तारी के बाद विनेश चंदेल को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। सुनवाई सोमवार देर रात तक चली, जिसके बाद अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन ने उन्हें 10 दिन की हिरासत में भेज दिया। ईडी अब आगे की जांच के आधार पर अगली कार्रवाई करेगी।

इस बीच, TMC नेता अभिषेक बनर्जी ने विनेश चंदेल की गिरफ्तारी पर चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा कि पश्चिम बंगाल चुनावों से करीब 10 दिन पहले आई-पैक के सह-संस्थापक की गिरफ्तारी न केवल चिंताजनक है, बल्कि ‘समान अवसर’ के सिद्धांत को भी प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि जब राज्य स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों की ओर बढ़ रहा है, ऐसे समय में यह कार्रवाई संदेश देती है कि यदि आप विपक्ष के साथ काम करते हैं, तो आप अगला निशाना बन सकते हैं। यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि भय का माहौल दर्शाता है।

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