मुंबई में कथित ₹71 लाख के क्रिप्टोकरेंसी फ्रॉड मामले में क्रिप्टो एक्सचेंज CoinDCX के सह-संस्थापकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस मामले में सुमित गुप्ता और नीरज खंडेलवाल के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई थी, जिसके बाद यह गिरफ्तारी की गई।
शिकायत के अनुसार, एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि उसे क्रिप्टो निवेश के नाम पर ₹71 लाख का चूना लगाया गया। इसके बाद मुंबई पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और दोनों सह-संस्थापकों को पूछताछ के लिए बुलाया गया, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
हालांकि, CoinDCX ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और FIR को झूठा और साजिश का हिस्सा बताया है। कंपनी का कहना है कि यह धोखाधड़ी उसके आधिकारिक प्लेटफॉर्म के जरिए नहीं, बल्कि एक फर्जी वेबसाइट के माध्यम से हुई, जो कंपनी और उसके संस्थापकों का नाम इस्तेमाल कर लोगों को ठग रही थी।
कंपनी ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, “हमारे को-फ़ाउंडर्स के ख़िलाफ़ दर्ज़ FIR झूठी है और CoinDCX के ख़िलाफ़ साज़िश के तौर पर दर्ज़ की गई है, जिसमें CoinDCX के फ़ाउंडर्स के तौर पर नकली लोगों ने आम लोगों को धोखा दिया है।”
The FIR filed against our co-founders is false and filed as a conspiracy against CoinDCX by impersonators posing as Founders of CoinDCX and cheating the public at large. We have taken cognizance of the fact and published a notice to public at large on our website that CoinDCX is…
— CoinDCX : India Ka Crypto Coach (@CoinDCX) March 21, 2026
कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि शिकायत में जिन पैसों के लेन-देन का जिक्र है, वे कथित तौर पर नकद और तीसरे पक्ष के खातों के जरिए हुए, जिनका CoinDCX से कोई संबंध नहीं है।
इस मामले ने भारत में तेजी से बढ़ रहे डिजिटल फाइनेंस और क्रिप्टो सेक्टर में साइबर धोखाधड़ी के खतरे को एक बार फिर उजागर किया है। कंपनी के अनुसार, अप्रैल 2024 से जनवरी 2026 के बीच उसने 1,200 से अधिक ऐसी फर्जी वेबसाइट्स की पहचान की है, जो उसके नाम का दुरुपयोग कर रही थी। CoinDCX ने यह भी कहा कि वह जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रही है ताकि सच्चाई सामने लाई जा सके और असली आरोपियों को पकड़ा जा सके।
गौरतलब है कि 2018 में स्थापित यह प्लेटफॉर्म भारत के बड़े क्रिप्टो लेनदेन कारोबार में से एक है। इससे पहले 2025 में कंपनी को एक बड़े साइबर हमले का सामना करना पड़ा था, जिसमें करीब 44 मिलियन डॉलर की संपत्ति चोरी हो गई थी। हालांकि, उस समय कंपनी ने दावा किया था कि यूजर्स के फंड सुरक्षित रहे और बाद में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया गया। फिलहाल, इस मामले में जांच जारी है और यह देखना अहम होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और क्या यह वास्तव में किसी बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क का हिस्सा है।
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