मध्य-पूर्व में जारी युद्ध के तेज होते हालात का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ नजर आया। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन सोमवार को बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे प्रमुख सूचकांक लाल निशान में खुलते ही फिसल गए। शुरुआती कारोबार में S&P BSE Sensex 1,520.60 अंक गिरकर 73,012.20 पर आ गया, जबकि NSE Nifty50 485.30 अंक टूटकर 22,629.20 के स्तर पर पहुंच गया।
बाजार में यह गिरावट ऐसे समय आई है जब कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं और मध्य-पूर्व में युद्ध के खत्म होने के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। वैश्विक अनिश्चितता के कारण निवेशकों में डर का माहौल है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजारों पर पड़ा है।
विश्लेषकों के अनुसारअमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे में होर्मुज स्ट्रेट खोलने का अल्टीमेटम दिया है, जिससे जंग और आगे बढ़ सकती है। ईरानी प्रेसिडेंट का जवाब है कि होर्मुज स्ट्रेट हमारी ज़मीन पर कब्ज़ा करने वालों को छोड़कर सभी के लिए खुला है, इससे तेल बाजार और जुड़े क्षेत्रों में डर का माहौल है। युद्ध आगे बढ़ने के डर से इस समय बाजार में बहुत अनिश्चितता के कारण निवेशकों में संयम के बजाए डर दिखाई दे रहा है।
शुरुआती कारोबार में आईटी सेक्टर के कुछ शेयरों ने हल्की मजबूती दिखाई। HCL टेक्नोलॉजी लिमिटेड 0.78% और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज लिमिटेड 0.24% की बढ़त के साथ गिने-चुने बढ़त वाले शेयरों में शामिल रहे।
वहीं दूसरी ओर, धातु और वित्तीय क्षेत्र के शेयरों में भारी गिरावट देखने को मिली। टाटा स्टील लिमिटेड सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा, जो 4.30% तक टूट गया। इसके अलावा अडानी पोर्ट्स एंड स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन लिमिटेड 3.91%, बजाज फाइनेंस लिमिटेड 3.58%, टाइटन कंपनी लिमिटेड 3.51% और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड 3.46% की गिरावट के साथ कारोबार करते दिखे।
बाजार में उतार-चढ़ाव का स्तर भी तेजी से बढ़ा है। वोलैटिलिटी इंडेक्स में 14.07% की उछाल दर्ज की गई, जो निवेशकों के बढ़ते डर को दर्शाता है। व्यापक बाजार में भी कमजोरी बनी रही, जहां मिडकैप और स्मॉलकैप सूचकांकों में लगभग 3% तक की गिरावट दर्ज की गई।
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में रहे। मेटल, पीएसयू बैंक, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, रियल्टी और फाइनेंशियल सर्विसेज जैसे प्रमुख सेक्टरों में 2% से 4% तक की गिरावट देखी गई। हालांकि आईटी सेक्टर में गिरावट अपेक्षाकृत कम रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मध्य-पूर्व में स्थिति स्पष्ट नहीं होती, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में निवेशकों को सतर्क रहने और जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचने की सलाह दी जा रही है।
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