देश में बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों पर सख्ती दिखाते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अब तक 1,105 मामलों की जांच की है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने लोकसभा में जानकारी दी कि इन मामलों में ₹64,920 करोड़ की अवैध संपत्ति अटैच की गई है।
उन्होंने बताया कि इन मामलों में अब तक 150 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि 277 अभियोजन शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं। साथ ही, 8 आरोपियों को भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 के तहत भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित किया गया है।
₹15,186 करोड़ की संपत्ति जब्त, बैंकों को राहत:
वित्त मंत्री के अनुसार, अब तक ₹15,186 करोड़ की संपत्ति को जब्त (कन्फिस्केट) किया जा चुका है, जिसमें से ₹15,183 करोड़ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को वापस भी किया गया है। इसके अलावा, मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ कानून धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002(PMLA) के तहत तीन आरोपियों को दोषी ठहराया गया है।
सीतारमन ने बताया कि 2018 में लागू किया गया भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम, 2018 (FEOA) ऐसे आर्थिक अपराधियों को रोकने के लिए बनाया गया था, जो देश छोड़कर विदेशों में रहकर कानून से बचने की कोशिश करते हैं। यह कानून ₹100 करोड़ या उससे अधिक के मामलों पर लागू होता है। इस कानून के तहत सरकार को अपराधियों की संपत्ति जब्त करने, बेनामी संपत्तियों को कब्जे में लेने, लुकआउट नोटिस जारी करने और उन्हें भारत में निवेश या शेयर खरीदने से रोकने का अधिकार मिलता है।
वित्त मंत्री ने पंजाब और महाराष्ट्र सहकारी बैंक घोटाले का जिक्र करते हुए बताया कि ED की मदद से बैंक ने ₹104 करोड़ की रिकवरी की है। इसके अलावा, FEOA के तहत ₹725 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई है।
लोकसभा में यह जानकारी उस दौरान दी गई, जब दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता (IBC) में संशोधन से जुड़े विधेयक पर चर्चा हो रही थी। चर्चा के बाद इस विधेयक को सदन ने पारित कर दिया। सरकार का कहना है कि इन सख्त कदमों से न केवल बैंकिंग प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि आर्थिक अपराधियों के खिलाफ मजबूत संदेश भी जाएगा।
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