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Tuesday, April 14, 2026
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भारतीय वायुसेना का बड़ा कदम: इज़राइली ROCKS मिसाइल के 200 पॉड्स खरीदने की तैयारी

 ‘मेक इन इंडिया’ के तहत स्थानीय उत्पादन पर जोर

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भारतीय वायुसेना (IAF) अपनी लंबी दूरी की मारक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, IAF करीब 200 इज़राइली ROCKS एयर-लॉन्च मिसाइल पॉड्स के अधिग्रहण पर विचार कर रही है, जिसमें तकनीक हस्तांतरण (Technology Transfer) और भारत में स्थानीय उत्पादन की योजना भी शामिल है।

यदि यह सौदा अंतिम रूप लेता है, तो ROCKS भारत में लाइसेंस के तहत निर्मित होने वाली दूसरी इज़राइली एयर-लॉन्च स्ट्राइक मिसाइल बन जाएगी। यह रक्षा क्षेत्र में आयात-आधारित खरीद से आगे बढ़कर तकनीक-आधारित साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।

इस परियोजना को गति तब मिली जब अप्रैल 2024 में भारतीय वायुसेना ने सुखोई Su-30MKI से क्रिस्टल मेज़-2 (ROCKS) का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण अंडमान व नोकोबार द्वीप समूह के ऊपर किया गया था, जिसमें मिसाइल ने 250 किलोमीटर से अधिक दूरी तक सटीक निशाना साधने की क्षमता प्रदर्शित की।

ROCKS मिसाइल की खासियत इसका हाइब्रिड गाइडेंस सिस्टम है, जिसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इनर्शियल नेविगेशन का संयोजन होता है। यह तकनीक GPS बाधित या इलेक्ट्रॉनिक जामिंग वाले वातावरण में भी सटीक हमले करने में सक्षम बनाती है, जो भारत के पश्चिमी और उत्तरी मोर्चों के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।

इस मिसाइल प्रणाली को हाल ही में अमेरिका के ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान भी इस्तेमाल किया गया, जहां इसने भारी सुरक्षा वाले लक्ष्यों पर प्रभावी प्रदर्शन किया। वास्तविक युद्ध में इसकी सफलता ने भारत के निर्णय लेने की प्रक्रिया को और तेज कर दिया है।

यह प्रस्ताव भारत की व्यापक मिसाइल अधिग्रहण रणनीति का हिस्सा है। दिसंबर 2025 में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने कई इज़राइली प्रणालियों को मंजूरी दी थी, जिनमें SPICE-1000, Rampage, Air लोरा और आइस ब्रेकर जैसे स्टैंड-ऑफ हथियार शामिल हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फरवरी 2026 में इज़राइल यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को और विस्तार मिला। इज़राइल ने आयरन डोम, आयरन बीम, एरो और डेविड्स स्लिंग जैसी उन्नत प्रणालियों में तकनीकी सहयोग की पेशकश भी की है।

यदि ROCKS परियोजना को अंतिम मंजूरी मिलती है, तो यह “मेक इन इंडिया” पहल को मजबूत करेगी। शुरुआती चरण में स्थानीय असेंबली और बाद में पूर्ण उत्पादन की योजना बनाई जा रही है। इसके लिए एक भारतीय निजी रक्षा कंपनी के साथ साझेदारी पर भी बातचीत चल रही है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिसाइल वायुसेना की “स्टैंड-ऑफ स्ट्राइक” क्षमता को नई ऊंचाई देगी, जिससे दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम की पहुंच से बाहर रहकर भी सटीक हमले किए जा सकेंगे। यह भारत की रक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है, जिसमें आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुसार दूर से हमला करने की क्षमता को प्राथमिकता दी जा रही है।

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