भारत के दिग्गज उद्योगपति और रेमंड ग्रुप के संस्थापक विजयपत सिंघानिया का रविवार (29 मार्च) को मुंबई में अंतिम संस्कार किया गया। 87 वर्षीय सिंघानिया का शनिवार (28 मार्च) शाम निधन हो गया था, जिसके बाद देशभर के कारोबारी और राजनीतिक जगत में शोक की लहर दौड़ गई। उनके पुत्र और रेमंड के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक गौतम सिंघानिया ने उनके निधन की पुष्टि की थी। अंतिम संस्कार में परिवार के सदस्यों के साथ कई गणमान्य लोग भी शामिल हुए और उन्हें अंतिम विदाई दी गई।
विजयपत सिंघानिया भारतीय कॉर्पोरेट जगत की उन प्रमुख हस्तियों में गिने जाते थे, जिन्होंने रेमंड समूह को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। 1980 के दशक में उनके नेतृत्व में कंपनी ने प्रतिस्पर्धात्मक दौर में भी अपनी मजबूत पहचान बनाए रखी। आर्थिक उदारीकरण से पहले ही उन्होंने कंपनी को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए।
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने सिंघानिया के निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा, “भारतीय उद्योग जगत के बहुत ही वरिष्ठ नाम, विजयपत सिंघानिया का निधन हमारे लिए बहुत दुर्भाग्यपूर्ण घटना है। ठाणे से उनका गहरा जुड़ाव रहा है और उन्होंने संवेदनशील तरीके से लोगों की सेवा की है। मैं उन्हें महाराष्ट्र सरकार की ओर से और व्यक्तिगत रूप से भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं।”
Mumbai, Maharashtra: DCM Eknath Shinde visited the Haveli to pay his last respects to the mortal remains of former Raymond Chairman and Padma Bhushan awardee Vijaypat Singhania. The funeral procession is set to proceed to Chandanwadi Cremation Ground for the final rites pic.twitter.com/BaIl1X1CgI
— IANS (@ians_india) March 29, 2026
विजयपत सिंघानिया सिर्फ एक सफल उद्योगपति ही नहीं, बल्कि रोमांच और विमानन के प्रति गहरी रुचि रखने वाले व्यक्तित्व भी थे। उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। नवंबर 2005 में 67 वर्ष की उम्र में उन्होंने हॉट एयर बैलून के जरिए करीब 69,000 फीट की ऊंचाई तक पहुंचकर विश्व रिकॉर्ड बनाया था। इससे पहले 1988 में उन्होंने माइक्रोलाइट विमान से लंदन से नई दिल्ली तक अकेले उड़ान भरते हुए ‘स्पीड-ओवर-टाइम एंड्यूरेंस’ का रिकॉर्ड भी कायम किया था।
मार्च 2007 में उन्हें भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद की गवर्निंग काउंसिल का अध्यक्ष नियुक्त किया गया था, जहां उन्होंने 2012 तक अपनी सेवाएं दीं। साल 2000 में उन्होंने रेमंड समूह की कमान अपने बेटे गौतम सिंघानिया को सौंप दी थी, हालांकि इसके बाद भी वह सार्वजनिक जीवन में सक्रिय रहे। विजयपत सिंघानिया का निधन भारतीय उद्योग जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनकी विरासत और योगदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।
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