भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिवसीय बैठक आज, 4 अगस्त से शुरू हो गई है। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब वैश्विक व्यापार प्रणाली अमेरिकी टैरिफ के नए झटकों से जूझ रही है। अमेरिका द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 25% आयात शुल्क लगाने के फैसले ने भारत के निर्यात और आर्थिक विकास पर चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में सवाल उठाए जा रहें है की RBI की तरफ से GDP ग्रोथ में लगने वाले 50 बेसिस पॉइंट से अधिक झटके से निपटने के लिए कोई फैसले लिए जाएंगे। साथ ही इस बार बाज़ार की निगाहें टिकी हैं कि क्या RBI ब्याज दरों में और कटौती करेगा या मौजूदा दरें बरकरार रखेगा। बैठक का निर्णय 6 अगस्त को घोषित किया जाएगा।
RBI ने अपनी पिछली तीन नीतिगत बैठकों में कुल 100 बेसिस पॉइंट (bps) की दर कटौती की है। पॉलिसी स्टांस अब भी न्यूट्रल बना हुआ है, लेकिन महंगाई में गिरावट और विकास में सुस्ती को देखते हुए अब एक और कटौती की संभावनाएं प्रबल हो गई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हालात RBI को एक और कटौती पर विचार करने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। जापान की ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने कहा है कि अगस्त बैठक में 35% संभावना है कि RBI अचानक दर में कटौती कर सकता है, जबकि अक्टूबर और दिसंबर में 25 bps की कटौती की उम्मीद जताई है। वृद्धि के लिए जोखिम बढ़ गए हैं और महंगाई फिलहाल नियंत्रण में है। यदि अमेरिकी टैरिफ का असर गहराता है, तो 50 bps तक की दर कटौती की संभावना बन सकती है।
SBI की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि RBI इस बैठक में 25 bps की कटौती कर सकता है ताकि त्योहारों के मौसम से पहले क्रेडिट मांग को प्रोत्साहित किया जा सके। रिपोर्ट में यह भी जोड़ा गया कि दिवाली से पहले दर कटौती का ऐतिहासिक रूप से सकारात्मक असर देखने को मिला है।
जून महीने में भारत की खुदरा महंगाई (CPI) 2.1% पर पहुंच गई, जो जनवरी 2019 के बाद सबसे निचला स्तर है। बार्कलेज का अनुमान है कि जुलाई में CPI और गिरकर 1.5% तक आ सकता है। यदि ऐसा होता है, तो पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के पहले क्वार्टर का औसत काफी नीचे रहेगा। बार्कलेज ने अपना सालाना महंगाई अनुमान 3.5% तक घटा दिया है, जो RBI के 3.7% अनुमान से भी कम है। इससे RBI को दरें घटाकर विकास को सहारा देने का अधिक अवसर मिल सकता है।
अगर RBI दरों में कटौती करता है तो इसका सीधा फायदा घर या व्यवसाय के लिए कर्ज लेने वालों को मिलेगा। सिग्नेचर ग्लोबल (इंडिया) लिमिटेड के चेयरमैन प्रदीप अग्रवाल ने कहा, “अगर RBI 25 बेसिस पॉइंट की कटौती करता है तो हाउसिंग मार्केट में और तेजी आ सकती है। पहले से ही कई बैंक 8% से कम पर होम लोन दे रहे हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि अगर दरें नहीं भी घटतीं, तो मौजूदा कम ब्याज दरें ही बाजार को सहारा देने के लिए काफी हैं।
वैश्विक व्यापारिक अनिश्चितता और अमेरिकी टैरिफ के दबाव के बीच, RBI को इस बैठक में संतुलन साधते हुए कदम उठाना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि RBI फिलहाल ‘न्यूट्रल’ रुख बरकरार रखते हुए जरूरत पड़ने पर आगे हस्तक्षेप के लिए तैयार रहेगा।
अब सभी की नजरें 6 अगस्त को आने वाले फैसले पर टिकी हैं, जो बैंकिंग, बाजार और कर्ज लेने वालों के लिए दिशा तय करेगा। चाहे दर कटे या बरकरार रहे, RBI का संकेत यही होगा कि वह महंगाई और वैश्विक व्यापार के हालात को देखकर ही आगे की राह चुनेगा।
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