भारतीय शेयर बाजार में बुधवार (1 अप्रैल) को जबरदस्त तेजी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में BSE Sensex 1,700 अंकों से अधिक उछल गया, जबकि Nifty 50 22,800 के स्तर को पार कर गया। सुबह करीब 9:17 बजे सेंसेक्स 1,706.39 अंक यानी 2.37% की बढ़त के साथ 73,653.94 पर कारोबार कर रहा था। खुलते ही सूचकांक ने 73,762.43 का स्तर छुआ और दिन के दौरान 73,847.08 का उच्च स्तर भी दर्ज किया। वहीं, निफ्टी 50 भी 512.50 अंक यानी 2.29% चढ़कर 22,843.90 पर पहुंच गया, जिसमें 50 में से 49 शेयर हरे निशान में कारोबार करते दिखे।
वैश्विक संकेतों से बढ़ा भरोसा
यह तेजी वेस्ट एशिया में तनाव कम होने के संकेतों के बाद आई है। डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका आने वाले 2–3 हफ्तों में ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान समाप्त कर सकता है। इससे वैश्विक निवेशकों की चिंता कम हुई और बाजार में खरीदारी बढ़ी।
साथ ही कच्चे तेल की कीमतें भी स्थिर होकर लगभग 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गईं, जिससे महंगाई के दबाव को लेकर आशंकाएं कुछ कम हुई हैं। एशियाई बाजारों में तेजी और अमेरिकी फ्यूचर्स में मजबूती ने भी भारतीय बाजार को समर्थन दिया।
किन शेयरों में रही सबसे ज्यादा तेजी
आज की तेजी में कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों ने बढ़त दर्ज की। ट्रेंट लिमिटेड के शेयर करीब 6% उछले और यह सेंसेक्स का टॉप गेनर रहा। इसके अलावा भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड में 4% से अधिक की तेजी आई।
वित्तीय और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में भी अच्छी खरीदारी देखने को मिली।बजाज फाइनेंस और लार्सन एंड टूब्रो के शेयरों में 3–4% की बढ़त रही।
एविएशन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर में इंटरग्लोब एविएशन के शेयर 3.5% से ज्यादा चढ़े, जबकि अडानी पोर्ट्स और विशेष आर्थिक क्षेत्र में भी 3% से अधिक की तेजी देखी गई।
बैंकिंग और आईटी सेक्टर भी मजबूत
बैंकिंग सेक्टर में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक के शेयर 2–3% तक चढ़े। वहीं इंफोसिस और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज जैसी आईटी कंपनियां में भी सकारात्मक रुख बना रहा। ऑटो और कंजम्प्शन सेक्टर में मारुति सुजुकी इंडिया और टाइटन कंपनी ने भी बाजार की तेजी को सपोर्ट किया।
विश्लेषकों का मानना है कि यह उछाल मार्च में आई भारी गिरावट के बाद तकनीकी रिकवरी और वैश्विक राहत संकेतों का संयुक्त असर है। विश्लेषक चेतावनी भी दे रहें है कि बाजार में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है, क्योंकि वेस्ट एशिया की स्थिति अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुई है और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगी।
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