भारत-EU समझौते से अमेरिका को हो रही जलन,अमेरिका के व्यापार प्रमुख ने कहा-“समझौता दिल्ली के पक्ष में झुका”

भारत-EU समझौते से अमेरिका को हो रही जलन,अमेरिका के व्यापार प्रमुख ने कहा-“समझौता दिल्ली के पक्ष में झुका”

The India-EU agreement is causing jealousy in the US, with the US trade representative saying, "The agreement is tilted in Delhi's favor."

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच अभूतपूर्व पैमाने के एक विशाल व्यापार समझौते के अंतिम रूप लेने के बाद अमेरिका की जलन खुलकर सामने आ रही है। अमेरिका के शीर्ष व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीर के अनुसार यह व्यापर समझौता समग्र रूप से भारत के पक्ष में जाता दिखाई देता है। अमेरिका के अनुसार, इस समझौते से भारत को यूरोपीय बाजारों तक व्यापक पहुंच मिलेगी और यूरोप में भारतीय श्रमिकों की आवाजाही (मोबिलिटी) भी बढ़ सकती है।

अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव) जैमीसन ग्रीर ने फॉक्स बिज़नेस को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि इस समझौते के लागू होने के बाद भारत ऊपर रहेगा और नई दिल्ली के लिए यह एक बड़े अवसर का दौर साबित हो सकता है। उन्होंने कहा, “मैंने अब तक समझौते के कुछ विवरण देखे हैं। मुझे लगता है कि, ईमानदारी से कहूं तो, इसमें भारत फायदे में रहा है। उन्हें यूरोप में ज्यादा मार्केट एक्सेस मिल रहा है।”

समझौते के संभावित प्रावधानों की ओर इशारा करते हुए ग्रीर ने आगे कहा, “ऐसा लगता है कि उन्हें कुछ अतिरिक्त आव्रजन अधिकार भी मिले हैं। मुझे पूरी तरह निश्चित नहीं है, लेकिन ईयू की अध्यक्ष वॉन डर लेयेन ने यूरोप में भारतीय श्रमिकों की मोबिलिटी की बात की है। इसलिए कुल मिलाकर, मुझे लगता है कि भारत के लिए यह एक शानदार दौर होगा।”

मंगलवार को भारत और यूरोपीय संघ ने इस ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप दिया, जिसे ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ के रूप में पेश किया गया है। इस समझौते से लगभग दो अरब लोगों का संयुक्त बाजार बनेगा और अगले पांच वर्षों के लिए एक परिवर्तनकारी एजेंडा सामने आएगा, जिसका उद्देश्य व्यापार और रक्षा सहयोग के जरिए नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था को मजबूत करना है। यह समझौता वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के लगभग एक-चौथाई हिस्से को कवर करेगा।

इस FTA के तहत यूरोपीय संघ में भारत के 99 प्रतिशत निर्यात पर शुल्क समाप्त किए जाएंगे, जबकि भारत में ईयू के 97 प्रतिशत से अधिक निर्यात पर आयात शुल्क में कटौती की जाएगी। इससे भारतीय उद्योगों को यूरोप में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलने की उम्मीद है।

हालांकि, अमेरिकी व्यापार प्रमुख ने इस घटनाक्रम के महत्व को कुछ हद तक कमतर आंकते हुए कहा कि बदलते वैश्विक व्यापार माहौल ने यूरोपीय संघ को वैकल्पिक बाजार तलाशने के लिए मजबूर किया है, क्योंकि अमेरिका घरेलू विनिर्माण को प्राथमिकता दे रहा है और अपेक्षाकृत सख्त व्यापार नीतियां अपना रहा है।

ग्रीर के अनुसार, “रणनीतिक रूप से यह समझना जरूरी है कि चूंकि राष्ट्रपति ट्रंप ने घरेलू उत्पादन को प्राथमिकता दी है और मूल रूप से दूसरे देशों से हमारे बाजार तक पहुंच के लिए शुल्क लेना शुरू किया है, इसलिए ये देश अपने अतिरिक्त उत्पादन के लिए दूसरे रास्ते तलाश रहे हैं। इसी वजह से ईयू भारत की ओर देख रहा है।”

बता दें की, इससे पहले भी अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसंट ने भारत-यूरोपीय संघ के बीच होने वाले व्यापार समझौते पहले कहा था, “रूसी तेल भारत में जाता है, वहां उससे रिफाइंड प्रोडक्ट्स बनते हैं और यूरोप वही रिफाइंड प्रोडक्ट्स खरीदता है। वे खुद के खिलाफ युद्ध को फाइनेंस कर रहे हैं।”

अब समझौते के बाद अमेरिकी के अनुसार यह डील भारत को उसकी कम लागत वाली श्रम शक्ति के सहारे यूरोपीय बाजारों में और अधिक पहुंच देगी, जबकि यूरोपीय संघ वैश्वीकरण पर और अधिक दांव लगाने की दिशा में आगे बढ़ता दिख रहा है।

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