एक स्पेशल NIA कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेता यासीन मलिक समेत सात लोगों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया है। इस केस में पाकिस्तान से हवाला के ज़रिए विदेशी फंड लेने का आरोप है। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) की जांच के मुताबिक, इस केस में 8 करोड़ 94 लाख 87 हजार 639 रुपये जेनरेट होने का आरोप है।
यासीन मलिक के अलावा, आरोपियों में ज़हूर अहमद शाह वटाली, अब्दुल रशीद शेख, शब्बीर अहमद शाह, नवल किशोर कपूर, ट्राइसन फार्म्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और मसरत आलम भट शामिल हैं। स्पेशल NIA जज प्रशांत शर्मा ने इन सभी सात आरोपियों के खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) के सेक्शन 3 के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया। कोर्ट के ऑब्जर्वेशन के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ प्राइमा फेसी काफी मटेरियल हैं और उनके खिलाफ पक्का शक है। ED की जांच के मुताबिक, पाकिस्तानी सरकार और दूसरे आतंकवादी संगठनों से अलग-अलग तरीकों से फंड मिल रहे थे। आरोप है कि यह पैसा हवाला के ज़रिए भारत लाया जा रहा था। जांच एजेंसी के मुताबिक, दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमीशन से कैश लाने वाले बिचौलिए यह पैसा हुर्रियत लीडरशिप तक पहुंचा रहे थे। इन पैसों का इस्तेमाल कथित तौर पर अलगाववादी और दूसरे गैर-कानूनी कामों के लिए किया गया।
ED की जांच में दावा किया गया है कि ऐसे डॉक्यूमेंट मिले हैं जिनसे पता चलता है कि यासीन मलिक, शब्बीर अहमद शाह और मसरत आलम को फाइनेंशियल ईयर 2015-16 में ज़हूर अहमद शाह वटाली के ज़रिए विदेशी फंड मिला था। NIA की दूसरी सप्लीमेंट्री चार्जशीट का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि जांच से पता चला है कि यासीन मलिक को सऊदी अरब से 15 लाख 75 हज़ार 595 रुपये मिले थे। ED के मुताबिक, मलिक को मिले विदेशी फंड की कुल रकम 30 लाख 75 हज़ार 595 रुपये थी और यह पैसा कथित तौर पर क्राइम की कमाई का हिस्सा है।
यह भी पढ़ें-
आईआईटी दिल्ली और एसीएसआईआर के बीच रिसर्च आदान-प्रदान के नए रास्ते खुले!



