दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट में 12 लोगों की मौत और कई के घायल होने के बाद, जांच एजेंसियों ने अब एक और नाम पर फोकस किया है वह है जम्मू-कश्मीर सरकार द्वारा 2023 में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के आरोप में बर्खास्त डॉ. निसार-उल-हसन। जम्मू-कश्मीर के SMHS अस्पताल श्रीनगर में असिस्टेंट प्रोफेसर रहे डॉ. हसन अल-फलाह यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद से हाल ही में जुड़े थे। रेड फोर्ट कार विस्फोट के बाद से वे लापता हैं, जिससे उनके संभावित संबंधों को लेकर जांच तेज हो गई है।
फरीदाबाद स्थित अल-फलाह यूनिवर्सिटी ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा है कि वह पूरी तरह जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रही है। विश्वविद्यालय के ओखला और साउथ दिल्ली कार्यालयों में फिलहाल किसी जांच टीम के पहुंचने की सूचना नहीं है। विश्वविद्यालय गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करने की तैयारी में है ताकि इस प्रकरण पर आधिकारिक स्पष्टीकरण दिया जा सके।
इस बीच, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की पुलिस ने एक लाल फोर्ड इकोस्पोर्ट (DL10CK0458) की राज्यव्यापी तलाश शुरू कर दी है। यह वही वाहन है जो रेड फोर्ट ब्लास्ट से जुड़ा माना जा रहा है। कार राजौरी गार्डन आरटीओ में 22 नवंबर 2017 को उमर उन नबी उर्फ डॉ. उमर मोहम्मद के नाम पर पंजीकृत हुई थी, और खरीद के समय नकली पता दिया गया था, जो बाद में उत्तर-पूर्वी दिल्ली के एक मदरसे से जुड़ा पाया गया। पुलिस ने इस स्थान पर छापा मारकर पूछताछ की, लेकिन वाहन का कोई सुराग नहीं मिला है।
सूत्रों के अनुसार, डॉ. उमर ने विस्फोट को दो सहयोगियों के साथ मिलकर योजना बनाई थी, लेकिन उनके फरीदाबाद में गिरफ्तार होने के बाद उसने हमला अकेले अंजाम दिया।
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह पूरा नेटवर्क 9 से 10 सदस्यों का था, जिनमें कई डॉक्टर और अकादमिक पेशेवर शामिल थे। इस नेटवर्क से जुड़े डॉ. मुजम्मिल और डॉ. शहीना शाहिद को फरीदाबाद से 2900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री के साथ गिरफ्तार किया गया था। माना जा रहा है कि यह समूह जैश-ए-मोहम्मद और अंसर ग़ज़वत-उल-हिंद जैसे आतंकी संगठनों से प्रेरित था और देशभर में ‘व्हाइट-कॉलर टेरर नेटवर्क’ के रूप में सक्रिय था।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि विस्फोट के वक्त कार चलाने वाला व्यक्ति डॉ. उमर ही था या नहीं। इसके लिए उनके परिवार के डीएनए सैंपल को ब्लास्ट साइट से मिले जैविक सबूतों से मिलाया जा रहा है। साथ ही, 3:00 से 6:30 बजे के बीच रेड फोर्ट क्षेत्र के मोबाइल टॉवर डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है ताकि यह पता चल सके कि डॉ. उमर ने किससे संपर्क किया था।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, “डॉ. निसार-उल-हसन के लापता होने से इस नेटवर्क की साजिश और गहरी होती दिख रही है। सभी संबंधित व्यक्तियों की गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।”
राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसियों ने इस मामले को “मल्टी-स्टेट व्हाइट-कॉलर टेरर प्लान” बताया है, जिसमें पेशेवर डॉक्टरों के जरिए शैक्षणिक संस्थानों को आतंकी गतिविधियों का फ्रंट बनाने की कोशिश की जा रही थी। देशभर में सुरक्षा अलर्ट जारी है और जांच दलों को डॉ. हसन की गिरफ्तारी को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
यह भी पढ़ें:
लाल किले धमाके के घायलों से मिलने LNJP अस्पताल पहुंचे प्रधानमंत्री मोदी, जताई संवेदना
नोएडा पुलिस ने पकड़ी ड्रग्स तस्करी गिरोह की बड़ी साजिश, पांच आरोपी गिरफ्तार
