पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शनिवार (25 अप्रैल) को रेशन वितरण (PDS) घोटाले के मामले में बड़ी कार्रवाई की। कोलकाता, बर्धमान और उत्तर 24 परगना जिले के हाबरा में सप्लायर्स और एक्सपोर्टर्स से जुड़े नौ ठिकानों पर छापेमारी की गई। ईडी के कोलकाता जोनल कार्यालय की टीम ने मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम 2002 (PMLA) के तहत यह कार्रवाई की। जिन स्थानों पर छापे पड़े, उनका संबंध रेशन घोटाले के आरोपी निरंजन चंद्र साहा और अन्य संबंधित लोगों से बताया जा रहा है। हाबरा में एक व्यवसायी के ठिकाने पर भी छापा मारा गया।
इस मामले में ईडी ने पश्चिम बंगाल पुलिस द्वारा दर्ज FIR के आधार पर जांच शुरू की थी। यह FIR 23 अक्टूबर 2020 को बशीरहाट पुलिस थाने में दर्ज की गई थी। घोजाडांगा एलसीएस के सीमा शुल्क उपायुक्त की शिकायत पर यह मामला सामने आया था, जिसमें सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के तहत गेहूं की बड़े पैमाने पर हेराफेरी का आरोप है।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने कल्याणकारी योजनाओं के लिए निर्धारित PDS गेहूं की हेराफेरी के लिए एक सुनियोजित तंत्र अपनाया था। इस गेहूं को सप्लायर्स, लाइसेंसधारी वितरकों, डीलरों और बिचौलियों की मिलीभगत से अवैध रूप से कम कीमत पर खरीदा गया। इसके बाद बड़ी मात्रा में गेहूं को सप्लाई चेन से हटाकर अलग-अलग स्थानों पर अवैध रूप से जमा किया गया।
गेहूं की पहचान छिपाने के लिए आरोपियों ने फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) और राज्य सरकार के निशान वाले मूल बोरे बदल दिए या उन्हें उलटकर फिर से भर दिया। इससे गेहूं की असली पहचान छिप गई और PDS का गेहूं वैध स्टॉक के रूप में दिखाकर खुले बाजार में बेचा गया। इस प्रक्रिया के जरिए आरोपियों ने अवैध रूप से भारी मुनाफा कमाया और ‘अपराध से अर्जित संपत्ति’ तैयार की, जैसा कि ईडी की जांच में सामने आया है।
यह भी पढ़ें:
दलबदलुओं पर कार्रवाई के लिए AAP एक्शन मोड में; सिसोदिया ने केजरीवाल से की मुलाकात
आतंकी साजिश में गिरफ्तार हिज्बुल्लाह खान की मां ने उसके मानसिक बीमार होने का किया दावा
पश्चिम बंगाल चुनाव के दौरान पक्षपात के आरोप में पांच पुलिस अधिकारी निलंबित



