मुंबई में क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे शख्स को गिरफ्तार किया है, जो खुद को IAS अधिकारी बताकर सरकारी सुविधाओं का मजा ले रहा था। बिहार के वैशाली जिले का रहने वाला 32 वर्षीय चंद्रमोहन प्रसाद उर्फ रामबली सिंह, दो दिनों से बांद्रा ईस्ट स्थित कस्टम विभाग के आलीशान गेस्ट हाउस में ठहरा हुआ था। लेकिन वह न तो कोई सिविल सर्वेंट था और न ही उसने UPSC की परीक्षा पास की थी।
28 जून की दोपहर करीब 1 बजे, दहिसर यूनिट 12 के कांस्टेबल लक्ष्मण बगावे और इंस्पेक्टर बालासाहेब राऊत को एक गुप्त सूचना मिली कि एक शख्स व्हाइट स्विफ्ट डिजायर कार में भारत सरकार की प्लेट लगाकर खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताकर घूम रहा है। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मलाड के सिल्वर ओक होटल के पास उस कार को रोका। पीछे की सीट पर आराम से बैठा यह व्यक्ति नकली पहचान पत्र दिखा रहा था, जिस पर उसे गृह मंत्रालय में ‘असिस्टेंट डायरेक्टर (सिक्योरिटी)’ बताया गया था।
पूछताछ के दौरान जब दस्तावेजों में खामियां दिखीं तो उसे दहिसर क्राइम ब्रांच कार्यालय ले जाया गया। वहां कड़ी पूछताछ में चंद्रमोहन ने कबूल किया कि वह 2017 में दिल्ली आया था सिविल सर्विस की तैयारी करने, लेकिन परीक्षा पास नहीं कर पाया। उसके कुछ दोस्त 2022 में IAS और IRS अधिकारी बन गए, जिससे वह गांववालों के सामने खुद को असफल साबित नहीं करना चाहता था। इसलिए उसने झूठ बोलकर खुद को भी IAS अधिकारी बताना शुरू कर दिया।
मुंबई वह तीन दिन की छुट्टी मनाने आया था और एक सरकारी कर्मचारी दोस्त की मदद से उसे बांद्रा के कस्टम गेस्ट हाउस में ठहरने की सुविधा मिल गई। उसने 24 वर्षीय ड्राइवर फारदिन सैफी को भी बुक किया, जिसे बताया गया था कि वह एक सीनियर अधिकारी को शहर घुमा रहा है। ड्राइवर ने बताया कि एक दिन पहले दादर में ट्रैफिक पुलिस को भी सिंह ने अपना नकली IAS पहचान पत्र दिखाकर बच निकलने की कोशिश की थी।
जब पुलिस ने उसकी तलाशी ली तो उसके पास से नकली ID कार्ड, 16 विजिटिंग कार्ड, दो मोबाइल फोन, आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और कुछ नकद बरामद हुए। सिंह ने कबूल किया कि वह ID खुद डिजाइन की थी और इससे अब तक कई लोगों को धोखे में रखा।
पुलिस अब यह जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में और कौन-कौन शामिल था। कार के मालिक और बुकिंग कराने वाले व्यक्ति से भी पूछताछ की जा रही है। आरोपी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 204 (सरकारी सेवक बनकर धोखा), 336(2) (जालसाजी), 336(3) (झूठा दस्तावेज बनाना), और 340 (नकली दस्तावेज को असली बताकर इस्तेमाल करना) के तहत मामला दर्ज किया गया है। अदालत ने उसे 3 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
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